Saturday, May 18, 2013

डोरोथिया ग्रासमैन की कविता

डोरोथिया ग्रासमैन की एक कविता... 

मैं समझ गई कुछ गड़बड़ है  :  डोरोथिया ग्रासमैन 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

मैं समझ गई कुछ गड़बड़ है 
जिस दिन मैंने कोशिश की 
धूप का एक छोटा सा टुकड़ा उठाने की 
और कोई आकार लेने का अनिच्छुक, 
वह फिसल गया मेरी उँगलियों से. 
बाकी सारी चीजें पूर्ववत ही रहीं -- 
कुर्सियाँ और कालीन 
और सारे कोने-अंतरे 
जहाँ जारी था इंतज़ार. 
             :: :: :: 

Wednesday, May 15, 2013

डोरोथिया ग्रासमैन : तुम्हें बताना है

डोरोथिया ग्रासमैन की एक कविता... 

तुम्हें बताना है  :  डोरोथिया ग्रासमैन 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

तुम्हें बताना है 
कभी-कभी होता है यूँ भी 
कि सूरज बजा देता है मुझे 
किसी घंटे की तरह,  
और मुझे याद आ जाता है सब कुछ, 
तुम्हारे कान भी. 
            :: :: :: 

Monday, May 13, 2013

क्रांतिकारी कवि लिओनेल रुगामा की कविता

लिओनेल रुगामा का जन्म 1949 में निकारागुआ में हुआ था. 1967 में वे, वहां के तानाशाह सोमोज़ा के विरुद्ध भूमिगत संघर्ष चला रही सांदिनीस्ता नेशनल लिबरेशन फ्रंट में शामिल हो गए और 15 जनवरी 1970 को बीस वर्ष की अल्पायु में सोमोज़ा की फौज से लड़ते हुए उनकी मृत्यु हो गई. यहाँ प्रस्तुत है उनकी एक कविता... 

पृथ्वी चंद्रमा की एक उपग्रह है  :  लिओनेल रुगामा  
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

अपोलो 2 ज्यादा महँगा था अपोलो 1 के मुकाबले 
अपोलो 1 बहुत महँगा था. 

अपोलो 3 ज्यादा महँगा था अपोलो 2 के मुकाबले 
अपोलो 2 ज्यादा महँगा था अपोलो 1 के मुकाबले 
अपोलो 1 बहुत महँगा था. 

अपोलो 4 ज्यादा महँगा था अपोलो 3 के मुकाबले 
अपोलो 3 ज्यादा महँगा था अपोलो 2 के मुकाबले 
अपोलो 2 ज्यादा महँगा था अपोलो 1 के मुकाबले 
अपोलो 1 बहुत महँगा था. 

अपोलो 8 ने तो भट्ठा ही बैठा दिया था, मगर किसी ने एतराज नहीं जताया 
क्योंकि अन्तरिक्ष यात्री प्रोटेस्टैंट थे 
उन्होंने बाइबिल का पाठ किया चंद्रमा पर 
और अचंभित और खुश कर दिया हर इसाई को 
और उनके लौटने पर पोप पॉल छंठे ने दुआ दी उन्हें. 

अपोलो 9 इन सबकी सम्मिलित लागत से भी अधिक महँगा था 
अपोलो 1 सहित, जो कि बहुत महँगा था. 

अकावालिंका के लोगों के परदादा-दादी  
भूख से कम पीड़ित थे, उनके दादा-दादी के मुकाबले. 
उनके परदादा-दादी मरे थे भूख से. 
अकावालिंका के लोगों के दादा-दादी 
भूख से कम पीड़ित थे, उनके माता-पिता के मुकाबले. 
उनके दादा-दादी मरे थे भूख से.  
अकावालिंका के लोगों के माता-पिता 
भूख से कम पीड़ित थे, वहाँ के लोगों के बच्चों के मुकाबले. 
उनके माता-पिता मरे थे भूख से. 

अकावालिंका के लोग भूख से कम पीड़ित हैं 
वहाँ के लोगों के बच्चों के मुकाबले. 
अकावालिंका के लोगों के बच्चे जन्मे नहीं हैं भूख के कारण 
वे भूखे हैं जन्म लेने के लिए, सिर्फ भूख से मर जाने के लिए ही. 
खुशकिस्मत हैं गरीब कि उन्हें चंद्रमा मिलेगा विरासत में. 
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