Wednesday, January 16, 2013

माइकल आगस्तीन : कविताओं के बारे में कुछ सवाल

आज मिलते हैं जर्मन कवि माइकल आगस्तीन (1954) से. आगस्तीन ने कविताओं के बारे में कुछ सवाल' उठाए हैं. ये सवाल बड़े मौजूं हैं और फिलहाल यहाँ उनकी पहली क़िस्त प्रस्तुत की जा रही है. जर्मन से अंग्रेजी अनुवाद उनकी पत्नी, भारतीय कवयित्री सुजाता भट्ट ने किया है... 
कविताओं के बारे में कुछ सवाल : माइकल आगस्तीन 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

कितनी लागत आती है 
एक कविता को 
पैदा करने में? 
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कौन सी कविता 
अपने रचयिता के बारे में ज्यादा बताती है: 
उसकी पहली या उसकी आखिरी कविता? 
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प्रति माह कितनी कविताओं की जरूरत पड़ती है 
चार लोगों के 
एक औसत परिवार को 
गुजारा चलाने के लिए? 
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क्या होता है 
कविता का 
विलोम? 
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क्या कविताएँ 
जान फूंक सकती हैं मुर्दों में? 
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क्या स्व-परागण से 
फलती-फूलती हैं फूलों से सम्बंधित कविताएँ 
या उन्हें जरूरत पड़ती है हमेशा 
भौरों से सम्बंधित किसी कविता की? 
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क्या प्रेम कविताएँ 
बंधी होती हैं किसी एक से 
या अंतरणीय होती हैं वे
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कितने दिन 
ज़िंदा रह सकता है 
कोई इंसान 
कविताओं के बिना? 
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Saturday, January 12, 2013

येहूदा हालेवी : शराब के बगैर प्याले

येहूदा हालेवी (1075 -- 1141) की एक कविता...  













शराब के बगैर प्याले : येहूदा हालेवी 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

मामूली चीज होते हैं शराब के बगैर प्याले 
जैसे जमीन पर फेंका हुआ कोई बर्तन, 
पर रस से छलछलाते, चमकते हैं वे 
जैसे शरीर और आत्मा. 
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Thursday, January 10, 2013

अफ़ज़ाल अहमद सैयद : अगर उन्हें मालूम हो जाए

अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   














अगर उन्हें मालूम हो जाए : अफ़ज़ाल अहमद सैयद 
(लिप्यान्तरण : मनोज पटेल) 

वह ज़िंदगी को डराते हैं 
मौत को रिश्वत देते हैं 
और उसकी आँख पर पट्टी बाँध देते हैं 

वह हमें तोहफ़े में ख़ंजर भेजते हैं 
और उम्मीद रखते हैं 
हम ख़ुद को हलाक कर लेंगे 

वह चिड़ियाघर में 
शेर के पिंजरे की जाली को कमज़ोर रखते हैं 
और जब हम वहां सैर करने जाते हैं 
उस दिन वह शेर का रातिब बंद कर देते हैं 
जब चाँद टूटा-फूटा नहीं होता 
वह हमें एक जज़ीरे की सैर को बुलाते हैं 
जहाँ न मारे जाने की ज़मानत का कागज़ 
वह कश्ती में इधर-उधर कर देते हैं 

अगर उन्हें मालूम हो जाए 
वह अच्छे क़ातिल नहीं 
तो वह कांपने लगें 
और उनकी नौकरियाँ छिन जाएं 

वह हमारे मारे जाने का ख़्वाब देखते हैं 
और ताबीर की किताबों को जला देते हैं 

वह हमारे नाम की कब्र खोदते हैं 
और उसमें लूट का माल छिपा देते हैं 

अगर उन्हें मालूम भी हो जाए 
कि हमें कैसे मारा जा सकता है 

फिर भी वह हमें नहीं मार सकते 
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Afzal Ahmed Syed (افضال احمد سيد)
रातिब  :  प्रतिदिन की ख़ुराक 
जज़ीरा  :  द्वीप, टापू 
ताबीर  :  ख़्वाब का मतलब 
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