Sunday, May 13, 2012

रोक डाल्टन : अब नहीं खुला करता बगीचे का फाटक

रोक डाल्टन की एक और कविता...  

 
संगीतकार मारियानो की मौत : रोक डाल्टन 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

अब परिंदे नहीं हैं वहां, जहां पियानो पड़ा रहता था इंतज़ार में 
बस एक बेनाम सी सिहरन की आकृतिहीन स्मृतियाँ. 

अब धूल झड़ रही है 
अपने रास्ते में आबनूस के उस बुत को पाए बगैर. 

अब नहीं खुला करता बगीचे का फाटक. 

कभी-कभी सोचता हूँ मैं 
कि हमारे मर जाने पर क्या मकान भी नहीं सहते 
विधवाओं जितनी ही तकलीफ.   

कम अज कम तब, जब किसी ने गाया हो 
या रची हों मीठी धुनें उनके भीतर 
मारियानो की तरह... 
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रोके दालतोन 

Saturday, May 12, 2012

ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट : हाथी

ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट की एक और कविता...   

 
हाथी : ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

वास्तव में, हाथी बहुत संवेदनशील और बेचैन प्राणी होते हैं. उनके पास अत्यधिक कल्पनाशक्ति होती है जिसके कारण कभी-कभी वे अपना आकार-प्रकार भूल जाते हैं. जब वे पानी में जाते हैं तो अपनी आँखें बंद कर लेते हैं. अपने खुद के पैरों को देखकर वे हताश हो रोते हैं. 

मैं एक हाथी को जानता हूँ जिसे एक मर्मर चिड़िया से प्यार हो गया. उसका वजन घट गया, नींद उड़ गई, और अंत में वह दिल टूट जाने से मर गया. हाथियों के स्वभाव से अनजान लोगों ने कहा: वह बहुत मोटा था.  
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Thursday, May 10, 2012

अपनी छोटी सी दुनिया में

करेन अलकालय-गट की एक और कविता... 

 
सलाह :  करेन अलकालय-गट 
(अनुवाद  : मनोज पटेल) 

बहुत गंभीरता से मत लो मुझे -- डर लगता है यह सोचकर 
कि मेरा हर शब्द बहुत गहरा मायने रखता है तुम्हारे लिए, 
कि बीस साल में तुम दोष देने लगोगे मुझे 
गलत सलाह देने के लिए, और मुझे अंदाजा भी नहीं होगा कि 
क्या कहा था मैंने. मैं सुरक्षित रखती हूँ अपना अधिकार 
हर समय बहुत सतर्क न रहने का -- झपकी लेने का, अपनी 
उस छोटी सी दुनिया में जा घुसने का जहां 
सिर्फ मैं गंभीरता से लेती हूँ खुद को. 
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