Friday, October 8, 2010

उसने कहा था : मारियो वर्गास ल्योसा

1 - यदि आप लेखक होने की वजह से मार दिए जाते हैं तो यह आपके जानते, आपके प्रति प्रदर्शित किया गया अधिकतम सम्मान होगा.

2 - यह सच नहीं है कि सिद्धदोष अपराधी जानवरों की तरह रहते हैं, जानवरों को तो घूमने-फिरने के लिए ज्यादा जगह हासिल होती है. 

3 - कितना भी क्षणभंगुर क्यों न हो, उपन्यास कुछ तो है जबकि हताशा कुछ भी नहीं. 

4 - साहित्यिक रचना और राजनीतिक गतिविधि में एक किस्म की असंगति होती है. 

5 - किताब लिखना नितांत अकेलेपन का काम है. आप बाक़ी दुनिया से कटे अपनी धुन और ख्यालों में डूबे हुए होते हैं. 

6 - लेखक अपने खुद के प्रेतों के ओझा होते हैं. 

7 - लेकिन मेरे पास है क्या ? बस वो बातें जो मुझसे कही गईं, और वो जो मैनें दूसरों से कहीं. 

8 - कोई खुद से नहीं लड़ सकता क्योंकि इस लड़ाई में हारने वाला एक ही होगा. 

9 - एक उपन्यास के लिए यह दुर्लभ और लगभग असंभव है कि उसका वाचक एक ही हो. 

10 - विज्ञान अब भी घुप्प अंधेरी गुफा में दिपदिपाती हुई मोमबत्ती ही है.  

11 - जिन्दगी गंदगी का तूफ़ान है जिसमें कला हमारी इकलौती छतरी है. 

12 - श्रृंगारिकता का अपना नैतिक औचित्य होता है क्योंकि इसके अनुसार मेरे लिए मज़ा ही सबकुछ है. यह वैयक्तिक प्रभुसत्ता का वृतांत है. 

13 - आप किसी को सर्जनात्मकता नहीं सिखा सकते - कि अच्छा लेखक कैसे बना जाए. लेकिन आप एक युवा लेखक को अपने अन्दर ही यह पाने में मदद कर सकते हैं कि वह किस तरह का लेखक बनाना चाहेगा. 

14 -  समृद्धि या समता - आपको चुनना होगा. मैं स्वतंत्रता का पक्षधर हूँ - वैसे भी आप वास्तविक समता हासिल नहीं कर सकते. आप बस एक भ्रम के लिए समृद्धि को कुर्बान कर देते हैं. 

(अनुवाद : मनोज पटेल)

2 comments:

  1. BAHUT ADBHUT HAIN YE VAKYA AUR BAHUT SARTHAK HAI AAPKA YE PRAYAS...

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