Tuesday, June 18, 2013

एन पोर्टर : जाड़े की सांझ

एन पोर्टर (Anne Porter) की एक कविता...   
जाड़े की सांझ : एन पोर्टर 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 
 
जाड़े की किसी साफ़ सांझ 
दूज का चाँद 

और बलूत के ठूँठ पर लगा 
गिलहरी का गोल घोंसला 

बराबर के ग्रह होते हैं. 
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3 comments:

  1. आज की ब्लॉग बुलेटिन आसमानी कहर... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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