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Friday, July 27, 2012

एर्नेस्तो कार्देनाल की कविता

'सुभाषित' श्रृंखला से ही एक और कविता...   

 
एर्नेस्तो कार्देनाल की कविता 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

हर शाम अपनी माँ के साथ वह टहला करती लैंडस्ट्रासे भर में 
और बाज़ार के मोड़ पर, हर शाम, 
वहां हिटलर इंतज़ार करता होता, उसे गुजरते देखने के लिए. 
टैक्सियाँ और बसें भरी होतीं चुम्बनों से 
और भाड़े पर नाव ले रहे होते जोड़े डेन्यूब पर. 
मगर उसे नहीं आता था नाचना. उससे बात करने की कभी हिम्मत नहीं हुई उसकी. 
बाद में वह गुजरती अपनी माँ के बिना ही, किसी रंगरूट के साथ. 
और उसके भी बाद वह कभी गुजरी ही नहीं उधर से. 
यही वजह है कि गेस्टापो झेला हमने, आस्ट्रिया पर कब्जा, 
और विश्व युद्ध. 
                         :: :: :: 
डेन्यूब : डेन्यूब नदी 

Saturday, July 21, 2012

एर्नेस्तो कार्देनाल : तोते


एर्नेस्तो कार्देनाल की एक और कविता...   

 
तोते : एर्नेस्तो कार्देनाल 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

मेरा दोस्त मिशेल कमान अधिकारी है सोमोतो में, 
          होंदुरास की सरहद के नजदीक, 
उसने मुझे तोतों से लदे ट्रक के पकड़े जाने के बारे में बताया 
जिसमें चोरी छिपे उन्हें ले जाया जा रहा था अमेरिका 
          उन्हें अंग्रेजी बोलना सिखाने के लिए. 
१८६ तोते थे उस पर, जिसमें से ४७ तोते पहले ही मर चुके थे अपने पिंजड़ों में. 
वह उन्हें वापस उस जगह ले गया जहां से उन्हें पकड़ा गया था, 
और जब ट्रक पहुँच रहा था पहाड़ों के पास मैदान कही जाने वाली एक जगह के करीब 
जहां के थे वे तोते 
          (उन मैदानों के पीछे विशालकाय दिखते थे पहाड़)  
खुशी से तोते फड़फड़ाने लगे अपने पंख 
          और चिपका लिया उन्होंने खुद को अपने पिंजड़े की दीवारों से. 
और जब खोले गए उनके पिंजड़े 
तीर की तरह उड़ गए वे सभी एक ही दिशा में अपने पहाड़ों की तरफ.  
ठीक यही किया क्रान्ति ने हमारे साथ, मुझे लगता है: 
इसने आजाद किया हमें पिंजड़ों से 
          जिनमें हमें ले जाया जा रहा था अंग्रेजी बोलने के लिए. 
और हमें अपनी मातृभूमि वापस ले आई यह जहां से उखाड़ा गया था हमें. 

तोते की तरह हरी वर्दी वाले कामरेडों ने 
                    तोतों को वापस दिलाए उनके हरे-भरे पहाड़. 
          मगर मर चुके थे ४७. 
                         :: :: :: 

Friday, July 20, 2012

एर्नेस्तो कार्देनाल की कविता

एर्नेस्तो कार्देनाल की 'सुभाषित' श्रृंखला से एक और कविता...   

 
एर्नेस्तो कार्देनाल की कविता 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

इलियाना: अन्द्रोमेदा की आकाशगंगा, 
सात लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर, 
किसी निरभ्र रात जिसे देखा जा सकता है नंगी आँखों  
करीब है तुम्हारी बनिस्बत. 
अन्द्रोमेदा से दूसरी एकाकी आँखें देख रही होंगी मुझे  
अपनी रात में. तुम नहीं दिखती मुझे. 
इलियाना: समय में है दूरी, और उड़ता जाता है समय. 
२० करोड़ मील प्रति घंटे की रफ़्तार से 
बढ़ता जा रहा है ब्रह्माण्ड शून्य की ओर. 
और तुम जैसे लाखों वर्ष दूर हो मुझसे. 
                    :: :: :: 

एर्नेस्तो कार्देनाल की कुछ और कविताएँ यहाँ पढ़िए. 

Saturday, October 29, 2011

एर्नेस्तो कार्देनाल की कविताएँ

एर्नेस्तो कार्देनाल की 'सुभाषित' श्रृंखला से कुछ और कविताएँ...



एर्नेस्तो कार्देनाल की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

जब तुम होती हो न्यूयार्क में 
न्यूयार्क में कोई और नहीं होता 
और जब तुम नहीं होती हो न्यूयार्क में 
न्यूयार्क में कोई भी नहीं होता 
               :: :: :: 

अगर अप्रैल बगावत के दौरान 
औरों के साथ मार दिया गया होता मैं भी 
तो जान नहीं पाया होता तुम्हें :
और अगर अब हुई होती अप्रैल बगावत 
मार ही दिया गया होता मैं औरों के साथ 
               :: :: ::  

बारिश की भारी बूँदें जैसे 
सीढ़ियाँ चढ़ रहे क़दमों की आहट
और दरवाजे से टकराती हवा 
जैसे अन्दर आने वाली हो कोई स्त्री 
               :: :: ::  
Manoj Patel Padhte Padhte अर्नेस्तो कार्देनाल 

Thursday, September 29, 2011

एर्नेस्तो कार्देनाल : तुम्हें इस तरह कोई नहीं प्यार करेगा

एर्नेस्तो कार्देनाल की 'सुभाषित' श्रृंखला से कुछ कविताएँ...













एर्नेस्तो कार्देनाल की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

हम दोनों ही हार गए जब मैनें खो दिया तुम्हें :
मैं इसलिए हारा क्यूंकि तुम ही थी जिसे मैं सबसे ज्यादा प्यार करता था 
और तुम इसलिए हारी क्यूंकि मैं ही था तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार करने वाला.
मगर हम दोनों में से तुमने, मुझसे ज्यादा खोया है :
क्यूंकि मैं किसी और को वैसे ही प्यार कर सकता हूँ जिस तरह तुम्हें किया करता था.  
मगर तुम्हें उस तरह कोई नहीं प्यार करेगा जिस तरह मैं किया करता था. 
                    :: :: ::

लड़कियों, तुम लोग जो किसी दिन पढ़ोगी इन कविताओं को आंदोलित होकर 
और सपने देखोगी किसी कवि के :
जानना कि मैनें लिखा था इन्हें तुम्हारे जैसी ही एक लड़की के लिए 
और व्यर्थ ही गया यह सब.
                    :: :: :: 

यही प्रतिशोध होगा मेरा :
कि एक दिन तुम्हारे हाथों में होगा एक प्रसिद्द कवि का कविता-संग्रह 
और तुम पढ़ोगी इन पंक्तियों को जिन्हें कवि ने तुम्हारे लिए लिक्खा था 
और तुम इसे जान भी नहीं पाओगी. 
                    :: :: :: 
Manoj Patel Translations अर्नेस्तो कार्देनाल 
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