उलाव हाउगे की एक और कविता...
रोड रोलर : ऊलाव हाउगे
(अनुवाद : मनोज पटेल)
मोड़ पर वह मुनासिब चेतावनी देता है तुम्हें,
नीम रौशनी में आता है तुम्हारी ओर,
सुलगते सींग
उसके माथे से झिलमिलाते हुए --
आता है बोझिल, साधिकार आता है लुढ़कते हुए
उस डामर पट्टी को बराबर करते जिस पर चलना ही है तुम्हें.
हर किसी को बने ही रहना है डामर पट्टियों पर,
प्रसूति गृह से शवदाहगृह तक दौड़ती
कन्वेयर बेल्टों पर.
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