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Friday, November 16, 2012

एथलबर्ट मिलर : रेबेका

एथलबर्ट मिलर की एक और कविता...    


रेबेका : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

क्या मैं नफरत करने लगूंगी आईनों से? 
नफरत करने लगूंगी अक्सों से?
क्या मैं नफरत करने लगूंगी कपड़े पहनने से? 
कपड़े उतारने से नफरत करने लगूंगी क्या? 

मेरा पति जिम कहता है मुझसे 
कि कोई फर्क नहीं पड़ता इससे 
चाहे एक रहे मेरे पास या दो 
दो या एक कोई फर्क नहीं 
वह कहता है 

मगर पड़ता है फर्क 
मुझे पता है कि पड़ता है 

मेरी देह है यह  
दक्षिण अफ्रीका या निकारागुआ नहीं 
मेरी देह 
एक जंग हारती हुई कैंसर के खिलाफ 
और अस्पताल के बाहर कोई प्रदर्शनकारी भी नहीं 
बंद करो का नारा लगाने के लिए 

केवल जिम है वहां 
बैठा हुआ बरामदे में 
सोचता हुआ कि क्या कहेगा वह 
अगली बार प्यार करते समय 
जब बढ़ेंगे उसके हाथ 
बचे हुए मेरे एक स्तन की ओर 

कैसे समझाएंगे हम खुद को 
कि कोई फर्क नहीं पड़ता इससे? 
कैसे स्वीकार करूंगी अपनी नग्नता को 
जो अब नहीं रही सम्पूर्ण? 
               :: :: ::  

Tuesday, November 13, 2012

एथलबर्ट मिलर : शिकारी

एथलबर्ट मिलर की एक और कविता...   


शिकारी : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

पुरुष 
जो 
पीछा करते हैं 
स्त्रियों 
का 

होते हैं 
शिकारियों  
की तरह  

जो 
पकड़ने के बाद 

मार देते हैं 
अपना 
शिकार. 
:: :: :: 

Monday, November 14, 2011

एथलबर्ट मिलर : प्रत्येक भाषा में

एथलबर्ट मिलर की एक कविता...



प्रत्येक भाषा में : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

मुझे याद दिलाओ (फिर से) कि तुम कितनी खूबसूरत हो 
फिर से थिरकना सिखा दो मेरे शब्दों को 
हाँ, उन्हें सिखा दो कविता 
मेरे शब्दों को झाँकने दो अपनी आँखों में 
और चखने दो अपने होंठों को 
यही तो याद आता है मुझे 
जब तुम चली जाती हो (फिर से) 
कि कितनी सूनी होती हैं सड़कें 
तुम्हारी बाहों के बगैर 
                    :: :: :: 
Manoj Patel 

Thursday, October 6, 2011

एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ

एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ... 














एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

तीनों का व्यक्तिचित्र 

कभी-कभी 
सिर्फ हम तीनों ही 
साथ होते हैं

मैं
तुम, और 
तुम्हारी सायकिल 

कभी-कभी 
जलन होती है मुझे 
कि कैसे 
घूमते और चक्कर खाते हैं पहिए 

कैसे तुम्हारे हाथ 
थामते हैं हैंडल 
जब तुम जा रही होती हो 
                    :: :: :: 

भूगोल 

मेरी चार साल की बेटी दुनिया के एक नक़्शे के साथ स्कूल से घर लौटती है. यह अफ्रीका है, वह मुझे बताती है. हम यहीं से आए हैं. डैडी, आप देखते रहिएगा, मैं बाक़ी की दुनिया को रंगने जा रही हूँ. मैं उसे यूरोप और पूरा अटलांटिक लाल रंग से रंगते हुए देखता हूँ. मैं उसे नीले और हरे रंगों के इस्तेमाल के लिए उकसाने की कोशिश करता हूँ लेकिन वह मना कर देती है. वह दुनिया को अपनी ही भूरी आँखों से देखती है. वह रंगना बंद कर देती है और नक़्शे पर सबसे ऊपर अपना नाम लिखती है. जास्मीन - वह किसी नन्हे कोलंबस की तरह कहती है. उसका मुंह आश्चर्य से गोल हो गया है. 
                                                     :: :: :: 
Manoj Patel Translations, Manoj Patel Blog

Wednesday, October 5, 2011

एथलबर्ट मिलर : जब मैनें पहली बार सुनी बम की आवाज़

एथलबर्ट मिलर की कविता...











शीर्षकहीन : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

जब मैनें पहली बार सुनी बम की आवाज़ 
मुझे लगा कि हिल रही है धरती 
धमाके से टूट गए बड़े-बड़े जार 
और वह दड़बा 
जिसमें माँ ने मुर्गियां पाल रखी थीं 
मैं बहुत डर गया था.

शुरूआती दिनों में 
ज्यादा प्रतिरोध नहीं था 
और पहाड़ियों पर बहुत नीचे तक 
उड़ा करते थे हवाई जहाज 

मेरे पिता मारे गए थे 
जब मैं तकरीबन दस साल का था 
मुझे अभी तक याद है वह साल जब हमने उन्हें दफनाया था 
वह पूरा साल ही था मौत का. 

आप अब भी पा सकते हैं हड्डियां
खेतों में उगती हुईं. 
                    :: :: :: 
Manoj Patel Translations, Manoj Patel Blog 

Sunday, September 25, 2011

एथलबर्ट मिलर : माँ की आँखें

आज बस एथलबर्ट मिलर की यह कविता...

















मेरे पिता की प्रेमिका : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

न्यूयार्क में 
मेरी माँ
कई दस्तकों के बाद 
खोलती हैं 
अपने घर का दरवाज़ा 

उनका चेहरा 
मुझे अल्बर्टा हंटर 
की याद दिलाता है 
जब वह रिटायरमेंट छोड़ 
वापस चली आई थी काम पर 

और उनकी आँखों में 
कुछ ऐसा 
जिससे प्यार हो गया था मेरे पिता को 
                    :: :: :: 

अल्बर्टा हंटर (1894 - 1984) गीतकार, गायिका और नर्स थीं. पचास के दशक में उन्होंने गायन से संन्यास लेकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया मगर अस्सी के दशक में वे फिर गायन की तरफ लौट आईं. 
Manoj Patel Translations 

Thursday, September 22, 2011

एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ

एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ... 












एथलबर्ट मिलर की दो कविताएँ
(अनुवाद : मनोज पटेल)

पहली बार 

जब पहली बार 
हमने प्यार किया 
मैं जागता रहा 
पूरी रात 
तुम्हें 
सोते देखते हुए 

बगल के घर में 
रहने वाला आदमी 
खांसता रहा 
रात भर 
:: :: ::


पहली किरण 

बिल्ली खोल देती है बेडरूम का दरवाजा 
देखता हूँ तुम्हें अकेले सोते हुए
चादर में छुपा है तुम्हारा चेहरा
कुछ घंटे बाक़ी हैं अभी पहली किरण के फूटने में 
मातृ दिवस है आज 
निपटाने के लिए कुछ काम पड़ा है मेरी मेज पर 
और भुगतान किए जाने के लिए कुछ बिल 
रेमंड कार्वर को पढ़ रहा हूँ मैं
कैसे कविता को जन्म देता है एक इंसान ?
कितनी मुश्किल और कितनी उम्मीद से 
:: :: :: 
Manoj Patel Translations 

एथलबर्ट मिलर : मेरे पिता का हैट

एथलबर्ट मिलर की कुछ कविताएँ आप इस ब्लॉग पर पहले पढ़ चुके हैं. आज उनकी एक और कविता...












अश्वेत व्यक्ति की आलमारी : एथलबर्ट मिलर 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

आलमारी के 
सबसे ऊपरी खाने में 
हैट रहता है मेरे पिता का 
जिसे वे पहनते हैं ख़ास मौकों पर 
यह उस बड़े से जार के बगल में रखा रहता है 
जिसमें वे रेजगारी इकट्ठा करते हैं 

नंगा ही रहता है उनका सर 
जब भी मैनें उन्हें देखा है 
सड़कों पर चलते हुए 

एकबार उनके बेडरूम में बैठा 
मैं देख रहा था उन्हें 
स्वेटरों और सूटों को उलटते-पुलटते 
वे कुछ ढूंढ़ रहे थे 
शायद कोई टाई

अचानक वे रुक गए 
और धीरे-धीरे गए आलमारी की तरफ 
उसमें से हैट निकाला अपना 

मैं बैठा रहा बिस्तर पर 
उनकी पीठ निहारता 
उनके मुड़ने का इंतज़ार करता हुआ
और यह बताने का कि किसकी मौत हो गई है 
                    :: :: :: 
Manoj Patel Translations

Thursday, January 27, 2011

एथलबर्ट मिलर की कविताएँ

वाशिंगटन में रहने वाले अफ्रीकी-अमेरिकी कवि एथलबर्ट मिलर (जन्म 20 नवम्बर 1950) की कविता से पहला परिचय उदय प्रकाश जी के एक उत्कृष्ट अनुवाद से हुआ था, तभी से इस कवि की कवितायेँ खोज रहा था. पेशे से शिक्षक, मिलर के नौ कविता संग्रह और दो  संस्मरणों की किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उन्होंने तीन कविता संकलनों का सम्पादन भी किया है. Poet Lore नामक पत्रिका के सह सम्पादक एथलबर्ट मिलर 1974 से हावर्ड यूनिवर्सिटी के अफ्रीकन अमेरिकन रिसोर्स सेंटर के निदेशक हैं.   


पनामा 
बीस के दशक की शुरूआत में 
एक जलयान ले आया था मेरे पिता को अमेरिका 
उनके बिलकुल पहले विचार 
अभिव्यक्त हुए थे स्पेनी भाषा में 

सालों बाद जब वह भूल गए यह भाषा 
भूल गए वह वो भी जो देखा था उन्होंने.

बड़े होना 
वह दिन जब मेरी माँ ने 
छीनकर फेंक दीं चित्रकथाओं की किताबें मेरी 
और उकसाया मुझे बाइबिल पढने को 
उसी दिन से छोड़ दिया मैनें होना एक सुपरहीरो 
और सोचना शुरू कर दिया चमत्कारों के बारे में 

इस तरह तुमसे प्यार करने लगा मैं 
जैसे मोजेज ने देखा था मुड़कर 
पहाड़ छोड़ने के पहले 

मध्य अमेरिका में घुमक्कड़ी 
अगर कोई 
सैलानी है 
     या अजनबी 
           या दोनों ही 
वह 
हमेशा सतर्क रहता है 
       कारों से
       सूनी सड़कों से 
       सैनिकों  
       बच्चों  
और यहाँ तक की 
अमेरिकी दूतावास से भी.

नदी 
मिलेंगे हम 
नदी के पास 
जहां एक छोटी नाव 
इंतज़ार कर रही होगी 
हमें उस पार ले जाने को 

ज़मीन है 
तुम्हारे दिल के नीचे 
पानी है प्यार तुम्हारा.

कामना के समय में 
कामना के समय में 
रुक जाती है धरती 
कोई कल नहीं होता 
केवल वर्तमान क्षण 
जब पहली बार 
स्पर्श करते हैं हम 

आज का दिन 
शुरू और ख़त्म होता है 
तुम्हारे भीतर.

(अनुवाद : Manoj Patel)
Ethelbert Miller 
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