पीट हाईन के कुछ और ग्रुक्स...
पीट हाईन के ग्रूक
(अनुवाद : मनोज पटेल)
आत्मकेंद्रित
हद दर्जे के
आत्मकेंद्रित होते हैं लोग
अपनी ही हांके जाएंगे वे
जब मैं बता रहा होता हूँ अपने बारे में.
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जैसा होता है प्यार
अनानास की तरह
होता है प्यार,
मीठा और
अपरिभाष्य.
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बराबरी
वह, जो
इरादा बांधता है बराबरी का
हमेशा आता है
दूसरे स्थान पर.
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ज़िंदगी का विरोधाभास
दार्शनिक ग्रूक
थोड़ा समझ से परे लगेगा यह
मगर कभी-कभी लगता है मुझे
कि दो ताला जड़े संदूकों जैसी होती है ज़िंदगी
और हर एक में बंद रहती है दूसरे की चाभी.
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