Showing posts with label पीट हाइन. Show all posts
Showing posts with label पीट हाइन. Show all posts

Sunday, March 25, 2012

पीट हाईन : अनानास की तरह होता है प्यार

पीट हाईन के कुछ और ग्रुक्स...   

 
पीट हाईन के ग्रूक  
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

आत्मकेंद्रित 

हद दर्जे के 
आत्मकेंद्रित होते हैं लोग 
अपनी ही हांके जाएंगे वे 
जब मैं बता रहा होता हूँ अपने बारे में. 
               :: :: :: 

जैसा होता है प्यार 

अनानास की तरह 
होता है प्यार, 
मीठा और 
अपरिभाष्य. 
               :: :: :: 

बराबरी 

वह, जो   
इरादा बांधता है बराबरी का 
हमेशा आता है 
दूसरे स्थान पर. 
               :: :: :: 

ज़िंदगी का विरोधाभास 
दार्शनिक ग्रूक 

थोड़ा समझ से परे लगेगा यह 
मगर कभी-कभी लगता है मुझे 
कि दो ताला जड़े संदूकों जैसी होती है ज़िंदगी 
और हर एक में बंद रहती है दूसरे की चाभी. 
               :: :: :: 

Tuesday, March 20, 2012

पीट हाइन की कविताएँ

डेनमार्क के कवि पीट हाइन (१९०५ - १९९६) लेखक होने के साथ-साथ वैज्ञानिक, गणितज्ञ, आविष्कारक और डिजाइनर भी थे. ग्रूक के नाम से जानी जाने वाली उनकी छोटी-छोटी कविताएँ अप्रैल १९४० में नाजी आधिपत्य के बाद एक अखबार में प्रकाशित होना शुरू हुईं थीं. प्रायः व्यंग्यात्मक प्रकृति की ये कविताएँ वे कुम्बल (कब्र का पत्थर) के छद्म नाम से लिखा करते थे.   










पीट हाइन के ग्रूक 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

तसल्ली 

निश्चित रूप से तकलीफदेह है 
एक दस्ताने का गुम होना, 
मगर उस तकलीफ का  
कोई मुकाबला ही नहीं 
कि एक दस्ताना खो जाने पर 
फेंक देना दूसरे को, 
और फिर 

मिल जाना पहले वाले का. 
:: :: :: 

अक्लमंदी का रास्ता 

अक्लमंदी का रास्ता? 
बहुत आसान है 
इसे समझाना: 
गलती 
और गलती 
फिर और गलती,  
मगर कम 
और कम 
फिर और कम. 
:: :: :: 

समानता 

कोई गाय घोड़े जैसी नहीं होती, 
और कोई घोड़ा नहीं होता गाय जैसा. 
बस यही एक समानता है 
जैसे-तैसे. 
:: :: :: 
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...