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Tuesday, March 8, 2011

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की कहानी


आपका यह ब्लॉग आज अपने छः महीने पूरे कर रहा है. इस मौके पर प्रस्तुत है गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की यह कहानी.  














ऐसे ही किसी दिन  : गाब्रिएल गार्सिया मार्केज 

उस सोमवार की सुबह, गर्म और बिना बारिश वाली हुई. तड़के जागने वाले औरेलियो एस्कोवार ने, जो  दांतों का बिना डिग्री वाला डाक्टर था, अपना क्लीनिक छः बजे ही खोल दिया. उसने शीशे की आलमारी से नकली दांत निकाले, जो अब भी खड़िया-मिट्टी के सांचे में जड़े हुए थे, और मुट्ठी भर औजारों को उनके आकार के क्रम में मेज पर यूं सजा के रखा जैसे उनकी नुमाइश की जा रही हो. उसने बिना कालर वाली एक धारीदार कमीज पहन रखी थी जिसके बन्द गले पर सुनहरा बटन था, और उसकी पैंट गेलिस से बन्धी हुई थी. वह  दुबला-पतला सींकिया इंसान था जिसकी निगाह कभी-कभार ही हालात के अनुरूप हो पाती थी, जैसा कि बहरे लोगों की निगाहों के मामले में होता है. 

औजारों को मेज पर व्यवस्थित करने के बाद वह ड्रिल को कुर्सी के पास खींच लाया और नकली दांतों को चमकाने बैठ गया. वह अपने काम के बारे में सोचता नहीं दिख रहा था, बल्कि, ड्रिल को अपने पैरों से चलाते हुए, तब भी जबकि उसकी जरूरत नहीं होती थी,  वह निरंतर काम किए जा रहा था.

आठ बजे के बाद खिड़की से आसमान को देखने के इरादे से,  वह थोड़ी देर के लिए रुका और उसने देखा कि दो विचारमग्न बाज़ बगल के मकान की शहतीर पर धूप ले रहे थे. वह इस ख़याल के साथ फिर काम में जुट गया कि दोपहर के खाने के पहले फिर से बारिश होगी. अपने ग्यारह वर्षीय बेटे की तेज आवाज से उसका ध्यान भंग हुआ.   

'पापा.'
'क्या है ?'
'मेयर पूछ रहे हैं कि क्या आप उनका दांत निकाल देंगे.'
'उससे बता दो कि मैं यहाँ नहीं हूँ.'

वह एक सोने का दांत चमका रहा था. हाथ भर की दूरी पर ले जाकर उसने आँखें भींचकर दांत को जांचा-परखा. छोटे से वेटिंग रूम से फिर उसका बेटा चिल्लाया. 

'वो कह रहे हैं कि आप यहीं हैं, और यह भी कि वह आपकी आवाज़ सुन सकते हैं.'

दंतचिकित्सक ने दांतो की जांच-पड़ताल जारी रखी. उसे मेज पर बाक़ी चमकाए जा चुके दांतों के साथ रखने के बाद ही वह बोला : 'अच्छा है, सुनने दो उसे.' 

वह फिर से ड्रिल चलाने लगा. उसने गत्ते के डिब्बे से, जहां कि वह ऐसी चीजें रखता था जिनपर काम करना बाक़ी है, कुछ दांत निकाले और सोने को चमकाने में जुट गया.

'पापा.'
'क्या है ?'
उसने अब भी अपना हाव-भाव नहीं बदला था.
'वह कह रहे हैं कि अगर आप उनका दांत नहीं निकालेंगे तो वह आपको गोली मार देंगे.'

बिना हड़बड़ाए, बहुत स्थिर गति से उसने ड्रिल को पैडल मारना बंद किया, उसे कुर्सी से परे धकेला और मेज की निचली दराज को पूरा बाहर खींच लिया. उसमें एक रिवाल्वर पड़ी थी. 'ठीक है,' उसने कहा. 'उससे कहो कि आकर मुझे गोली मार दे.'

उसने कुर्सी को घुमाकर दरवाजे के सामने कर लिया, उसका हाथ दराज के सिरे पर टिका हुआ था. मेयर दरवाजे पर नजर आया. उसने अपने चेहरे के बाईं तरफ तो दाढी बनाई हुई थी, लेकिन दूसरी तरफ, सूजन और दर्द की वजह से पांच दिन की बढ़ी हुई दाढ़ी मौजूद थी. दंतचिकित्सक ने उसकी नीरस आँखों में कई रातों की नाउम्मीदी देखी. उसने अपने उंगली के पोरों से दराज को बंद कर धीरे से कहा : 

'बैठ जाओ.'
'गुड मार्निंग,' मेयर ने कहा.
'मार्निंग,' दंतचिकित्सक ने जवाब दिया. 

जब औजार उबल रहे थे, मेयर ने अपना सर कुर्सी के सिरहाने पर टिका दिया और कुछ बेहतर महसूस करने लगा. उसकी साँसे सर्द थीं. यह एक घटिया क्लीनिक थी : एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी, पैर से चलने वाली एक ड्रिल, मिट्टी की शीशियों से भरी एक शीशे की आलमारी. कुर्सी के सामने एक खिड़की थी जिसपर कन्धों की ऊंचाई तक के परदे पड़े हुए थे. जब उसने दंतचिकित्सक को आता हुआ महसूस किया, तो उसने अपनी एड़ी को कड़ा करके मुंह खोल दिया. 

औरेलियो एस्कोवार ने अपना सर रोशनी की दिशा में घुमा लिया. संक्रमित दांत के मुआयने के बाद उसने उँगलियों के सतर्क दबाव से मेयर का जबड़ा बंद कर दिया. 

'यह काम संवेदनशून्य किए बिना ही करना पड़ेगा,' उसने कहा.
'क्यों ?' 
'क्योंकि अन्दर एक घाव है.'

मेयर ने उसकी आँखों में देखा. 'ठीक है,' उसने कहा, और मुस्कराने की कोशिश की. दंतचिकित्सक जवाब में नहीं मुस्कराया. अब भी बिना किसी जल्दबाजी के वह, विसंक्रमित औजारों का पात्र, काम करने की मेज तक ले आया और उन्हें एक ठंडी चिमटी की सहायता से पानी से बाहर निकाला. फिर उसने पीकदान को जूते की नोक से धकेला और वाशबेसिन में हाथ धुलने के लिए गया. यह सब उसने मेयर की तरफ देखे बिना ही किया. लेकिन मेयर ने उस पर से अपनी नजरें नहीं हटाईं. 

घाव  अक्ल दाढ़ के निचले हिस्से में था. दंतचिकित्सक ने अपने पैर फैलाकर गर्म संडासी से दांत को पकड़ लिया. मेयर ने कुर्सी के हत्थों को मजबूती से थाम लिया, अपनी पूरी ताकत से पैरों को कड़ा कर लिया और अपने गुर्दों में एक बर्फीला खालीपन महसूस किया मगर कोई आवाज़ नहीं निकाली. दंतचिकित्सक ने महज अपनी कलाई को हरकत दी. बिना किसी विद्वेष के, बल्कि एक कटु कोमलता के साथ, उसने कहा : 

'अब तुम हमारे बीस मारे गए लोगों की कीमत अदा करोगे.'

मेयर ने अपने जबड़े में हड्डियों की चरमराहट महसूस की, और उसकी आँखें आंसुओं से भर आईं. लेकिन उसने तब तक सांस नहीं लिया जब तक कि उसे दांत निकलने का एहसास न हो गया. फिर उसने अपने आंसुओं के बीच से उसे देखा. उसके दर्द के चलते वह इतना पराया नजर आ रहा था कि वह अपनी पिछली पांच रातों की यातना समझने में नाकाम रहा. 

पीकदान पर झुके, पसीने से तर, हाँफते हुए उसने अपनी जैकेट की बटन खोली और पैंट की जेब से रुमाल निकालने को हुआ. दंतचिकित्सक ने उसे एक साफ़ कपड़ा दिया.

'अपने आंसू पोंछ लो,' उसने कहा.

मेयर ने ऐसा ही किया. वह काँप रहा था. जब दंतचिकित्सक अपने हाथ धुल रहा था, उसने जीर्ण-शीर्ण छत और धूल से अटे, मकड़ी के अण्डों और मरे हुए कीड़े-मकोड़ों से भरे मकड़ी के जाले की तरफ देखा. अपने हाथ पोंछते हुए दंतचिकित्सक वापस लौटा. 'जाकर सो जाओ,' उसने कहा, 'और नमक-पानी से गरारा कर लेना.' मेयर उठ खड़ा हुआ और एक अनौपचारिक फ़ौजी सलामी के साथ विदा लेकर, जैकेट की बटन बंद किए बिना ही, अपने पैर फैलाते, दरवाजे की ओर बढ़ चला. 

'बिल भेज देना,' उसने कहा.
'तुम्हारे या शहर के नाम ?'
मेयर ने उसकी तरफ नहीं देखा. उसने दरवाजा बंद कर दिया और परदे के पीछे से कहा : 
'एक ही बात है.'










(अनुवाद : मनोज पटेल)
Gabriel Garcia Marquez in Hindi 

Monday, February 7, 2011

शकीरा पर मार्केज : जादूगरनी पर एक जादुई यथार्थवादी

(ज्यादातर लेखकों में किसी लोकप्रिय विधा या लोकप्रिय कलाकार पर लिखते हुए एक किस्म का संकोच ही होता है. लोकप्रिय होना अगंभीर और अछूत माना जाता है. इस लेख का महत्त्व इसलिए ही है कि मार्केज जैसे पाए के लेखक ने अपने से बहुत कम उम्र की हमवतन  पॉप गायिका शकीरा पर कलम चलाई है. मार्केज और शकीरा कोलंबिया के दो सबसे मशहूर लोगों में हैं. लेख आज से करीब नौ साल पुराना है और अन्य बहुत सी जगहों के साथ-साथ 8 जून 2002 के गार्जियन में प्रकाशित हुआ था.)


शायर और शहजादी 

शकीरा ने 1 फरवरी को मियामी से ब्यूनस आयर्स के लिए उड़ान भरी. उसका पीछा एक पत्रकार कर रहा था जो उससे एक रेडियो कार्यक्रम के लिए फोन पर सिर्फ एक सवाल पूछना चाहता था. तमाम वजहों से वह अगले 27 दिनों तक उससे संपर्क स्थापित करने में नाकाम रहा, फिर मार्च के पहले हफ्ते में वह स्पेन में उसका पता भी न लगा सका. उसके पास कुलजमा एक कहानी का आइडिया और उसके लिए एक शीर्षक था, "जब कोई उसे न ढूंढ़ पाए उस वक्त शकीरा क्या कर रही होती है ?" शकीरा हँसते-हँसते दोहरी हो उठी, डायरी हाथ में लिए हुए वह कहती है, "मजे कर रही होती हूँ मैं." 

शकीरा पहली फरवरी की शाम को ब्यूनस आयर्स पहुंची थी, और अगले दिन आधी रात तक काम करती रही ; आज उसका जन्मदिन था लेकिन इसे मनाने का उसके पास मौक़ा नहीं था. बुधवार को उसने वापस मियामी का रुख किया, जहां उसने एक बड़े प्रचार अभियान के लिए तस्वीरें उतरवाईं और कुछ घंटे अपने नए एल्बम के अंग्रेजी संस्करण की रिकार्डिंग में खर्च किए. शुक्रवार दो बजे दोपहर से वह शनिवार की सुबह तक रिकार्डिंग कराती रही, तीन घंटे सोई और फिर वापस स्टूडियो पहुँच गई जहां वह दोपहर के तीन बजे तक काम करती रही. उस रात, वह कुछ घंटे सोई और रविवार को तड़के ही लीमा की उड़ान में सवार हो गई. सोमवार की दोपहर वह एक लाइव टेलीविजन शो में नजर आई; चार बजे एक टेलीविजन विज्ञापन के लिए उसका फिल्मांकन हुआ, शाम को वह अपने प्रचारकों द्वारा दी गई एक दावत में शामिल हुई, और सुबह तक रुकी रह गई. अगले दिन 9 फरवरी को उसने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, आधे-आधे घंटे के 11 इंटरव्यू रेडियो, टेलीविजन और अखबारों को दिए. बीच में उसने दोपहर के खाने के लिए बस एक घंटे का अवकाश लिया था. उसे वापस मियामी में होना था लेकिन आखिरी  क्षणों में बोगोटा में एक घंटे का ठहराव आयोजित कर लिया जहां वह भूकंप पीड़ितों को दिलासा देने पहुंची.   

 उस रात, किसी तरह उसने मियामी की आखिरी उड़ान पकड़ने का बंदोबस्त किया जहां उसने चार दिन स्पेन और पेरिस के संगीत कार्यक्रमों की तैयारी में खर्च किए. ग्लोरिया एस्टीफन के साथ उसने शनिवार को दोपहर के खाने के समय से रविवार को सुबह 4:30 बजे तक अपने एल्बमों के अंग्रेजी संस्करण पर काम किया. सुबह होने पर वह अपने घर गई, एक काफी के साथ एक ब्रेड खाकर वह पूरे कपड़ों में ही सो गई. डेढ़ घंटे बाद उसे रेडियो इंटरव्यू की एक श्रृंखला के लिए जागना था. मंगलवार 16 तारीख को वह कोस्टा रिका के एक लाइव टी वी शो में नजर आई. बृहस्पतिवार को उसने मियामी और फिर कराकस के लिए उड़ान भारी जहां उसे टेलीविजन शो सेंसेशनल सेटरडे में भाग लेना था. 

वह बमुश्किल सो पाई - 21 को उसे ग्रेमी समारोह में शिरकत करने के लिए वेनजुएला से लॉस एंजिल्स की उड़ान भरनी थी. उसने पुरस्कार विजेताओं में से एक होने की उम्मीद लगाई थी मगर सभी मुख्य पुरस्कार अमेरिकी ही झटक ले गए. इतने पर भी उसकी रफ़्तार कम नहीं हुई : 25 को उसने स्पेन के लिए उड़ान भरी, जहां उसने 27 और 28 फरवरी को काम किया. 1 मार्च तक, जब वह किसी तरह मेड्रिड के एक होटल में पूरी रात सोने का वक़्त निकाल पाई, वह किसी पेशेवर विमान परिचारिका जितना हवाई सफ़र तय कर चुकी थी - एक महीने में 40000 किलोमीटर से भी ज्यादा.

ठोस धरातल पर शकीरा का काम इससे कम की मांग भी नहीं करता. उसके साथ सफ़र करने वाली टीम, जिसमें संगीतकार, लाईट टेक्नीशियन, मंच सहायक और साउंड इंजीनियर आदि होते हैं, किसी सैन्य टुकड़ी जैसी दिखती है. वह हर चीज पर खुद ही नजर रखती है. वह संगीत पढ़ती नहीं है, मगर उसकी अचूक आवाज़ और सम्पूर्ण ध्यान उसे और उसके संगीतकारों को हर स्वर ठीक-ठीक समझने की इजाजत देते हैं. वह अपनी टीम के सभी सदस्यों का व्यक्तिगत ध्यान रखती है. कभी-कभार ही वह अपनी थकान जाहिर होने देती है, लेकिन इससे आप कुछ और न समझें. 40 कार्यक्रमों वाले अर्जेंटीना के एक दौरे के आखिरी कुछ दिनों एक सहायक उसे बस में चढ़ने में मदद करने के लिए इंतज़ार कर रहा हो सकता है. वह अक्सर घबराहट और त्वचा संक्रमण की वजह से जलन आदि से बीमार हो जाती है.   

एमिलो एस्टीफन और उसकी बीवी ग्लोरिया के सहयोग से जारी होने वाले व्हेयर आर द थीव्स  एल्बम के अंग्रेजी संस्करण की विकट तैयारियों से हालात और भी संगीन हो गए. इसमें शकीरा अपनी ज़िंदगी के सबसे कठिन दबाव से होकर गुजरी : वह कामचलाऊ अंग्रेजी बोल लेती है, लेकिन उसने अपने उच्चारण पर बहुत मेहनत की, उसे ऎसी धुन सवार हुई कि वह अक्सर रात में सोते हुए अंग्रेजी बोला करती. अमेरिका में अपने प्रथम प्रदर्शन से पहले वाली रात उसे बुखार हो गया और वह सो नहीं पाई, "यह सोचकर कि मैं कुछ कर नहीं पाऊंगी मैं पूरी रात रोती रही." 

बरान्किला कोलंबिया के सोनार विलियम मेबारक और उनकी पत्नी नीडिया रिपोल्ल की इकलौती बेटी शकीरा का जन्म अरब वंश परम्परा वाले एक कलाप्रेमी परिवार में हुआ था. उसकी अकालपक्वता का ही नतीजा था कि उसने शुरुआती कुछ ही सालों में इतना कुछ सीख लिया जितना कि लोगबाग दशकों में सीख पाते हैं. 17 महीनों में ही वह अक्षरों का उच्चारण करने लगी थी; 3 साल में उसने गिनती सीख ली थी; चार साल की उम्र में वह अपने बरान्किला कान्वेंट स्कूल में बेले डांस करने लगी थी. इस स्कूल में 1930 के दशक में एक विलासी स्टाफ सदस्य ने शिरला टेम्पल पंथ का एक स्मारक खड़ा करवाना चाहा था. सात साल की उम्र तक शकीरा ने अपना पहला गाना लिख डाला था. आठ की होते-होते उसने कवितायेँ लिखना और दस की उम्र में उसने अपने मौलिक गीत लिखना और संगीतबद्ध करना शुरू कर दिया. इसी समय उसने अटलांटिक तट पर स्थित एल सेरेजान कोयला खदान के मजदूरों के मनोरंजन करने के अपने पहले अनुबंध पर दस्तखत किए. उसने अपनी माध्यमिक शिक्षा भी नहीं शुरू की थी जब एक रिकार्ड कम्पनी ने उसे साइन किया.   

   "मैं हमेशा से जानती थी कि मैं अत्यधिक रचनात्मक हूँ," वह बताती है, "मैनें प्रेम कवितायेँ कहीं, कहानियां लिखीं और गणित को छोड़कर हमेशा हर विषय में अच्छे नंबर लाकर दिखाए." जब उसके मम्मी-पापा के दोस्त उसके घर आते और उससे कुछ गाने के लिए कहते तो उसे अच्छा नहीं लगता था. "मुझे 30000 लोगों की भीड़ बेहतर लगती बनिस्बत कि पांच बुजुर्ग मुझे गाना गाते और गिटार बजाते सुन रहे हों." वह कमजोर लगती है, लेकिन उसे हमेशा यह पक्का पता था कि उसे विश्वप्रसिद्ध होना है. उसे यह नहीं मालुम था कि कैसे या किस चीज के लिए लेकिन इस बारे में उसे कभी तनिक भी संदेह नहीं रहा. यह तो उसकी नियति थी. 

आज उसके सपने सच से भी ज्यादा साबित हुए हैं. शकीरा का संगीत किसी और की तरह नहीं लगता और उसने एक तरह की मासूम ऐंद्रिकता का अपना ख़ास ब्रांड ईजाद किया है. "अगर मैं न गाऊँ तो मैं मर जाऊंगा", एक ऎसी बात है जो अक्सर हल्के में कह दी जाती है, लेकिन शकीरा के मामले में यह सच है : जब वह गा नहीं रही होती है तो बमुश्किल ही ज़िंदा होती है. आंतरिक शान्ति उसे भीड़ में भी अकेला होने की अपनी काबिलियत की वजह से हासिल होती है. वह कभी मंच-भय का शिकार नहीं हुई : वह महज मंच पर न होने से डरती है. "वहां मुझे वैसा ही लगता है", वह कहती है "जैसे जंगल में कोई शेर." यही वह जगह है जहां कि वह सचमुच अपने वास्तविक स्वरुप में आ सकती है.       

  भीड़ के भय से मुकाबला करने से बचने के लिए बहुत से गायक मंच से परे जगमग रोशनियों की तरफ देखा करते हैं. शकीरा इसका ठीक उलटा करती है, अपने सहायकों से वह कहती है कि वे सबसे जोरदार लाईट श्रोताओं की तरफ घुमा दें, ताकि वह उन्हें देख सके. "इससे पूरा संवाद होता है," वह बताती है. वह अनाम, अनुनमेय भीड़ को अपनी मर्जी और प्रेरणा के हिसाब से ढाल सकती है. "जब मैं लोगों के सामने गा रही होती हूँ तो उनकी आँखों में देखना पसंद करती हूँ." कभी-कभी दर्शकों को देखते हुए उसे कुछ ऐसे चेहरे नजर आते हैं जो उसने पहले कभी नहीं देखे, मगर उन्हें वह पुराने दोस्त के बतौर जानती होती है. एक बार उसने एक ऐसे शख्स को देखा जो सालों पहले मर चुका था. एक और समय उसे लगा कि कोई उसे किसी और जन्म से देख रहा है. "मैं पूरी रात उसके लिए गाती रही," वह कहती है. ऐसे चमत्कार बहुत से महान कलाकारों के लिए प्रेरणा - और अक्सर बर्बादी - का कारण रहे हैं.    

 शकीरा के बारे में सबसे विस्मयकारी बात है अधिकाँश बच्चों का उसकी दीवानगी में जकड़ जाना. 1996 में जब उसका एल्बम पायस डेस्कैल्जोस जारी हुआ, उसके प्रचारकों ने कैरेबियाई द्वीपों के लोक समारोहों के मध्यांतर के दौरान उसका प्रचार करने का फैसला किया. मगर जब बच्चों ने संगीत के साथ नाचते-गाते हुए यह मांग करना शुरू कर दिया कि वे पूरी शाम सिर्फ और सिर्फ शकीरा को ही सुनना चाहते हैं, तो उन्हें अपना रुख बदलना पड़ा. आज यह विषय शोध प्रबंध के लायक है. शकीरा की ही तरह के कपड़े, बातचीत और गाने गाते हुए, हर सामाजिक वर्ग के प्राथमिक स्कूलों की सभी बच्चियां उसकी प्रतिरूप बन चुकी हैं. छः वर्षीय लडकियां उसकी सबसे समर्पित प्रशंसक हैं.  

अवैध तरीके से तैयार किए गए एल्बम अवकाश के समय अदले-बदले जाते हैं और सस्ती दरों पर बेंचे जाते हैं. उसकी मालाओं, बालियों और बालों में लगाने के सामानों की नकलें दुकानों पर आते ही बिक जाते हैं. बाजार थोक के भाव लड़कियों को हेयर डाई बेंचता है ताकि वे शकीरा की नवीनतम शैली के अनुसार अपना रूप बदल सकें. वह लड़की जो सबसे पहले उसका नवीनतम एल्बम पा जाती है स्कूल की सबसे लोकप्रिय लड़की बन जाती है. सबसे अच्छी उपस्थिति वाले अध्ययन समूह वे होते हैं जो स्कूल के बाद लड़कियों के हास्टल में जुटते हैं - वहां होमवर्क पर एक सरसरी नजर डाली जाएगी, फिर कुछ हल्ला-गुल्ला मचेगा. जन्मदिन पार्टियां तमाम छोटी शकीराओं का बटोर होती हैं, सिर्फ उसी की धुन पर नाचते-गाते हुए बच्चे. सबसे खालिस दायरों में - और ऐसे बहुत से दायरे हैं - लड़कों को आमंत्रित नहीं किया जाता. 

अपनी असाधारण संगीत प्रतिभा और बाजार बोध के बावजूद शकीरा को यह मुकाम न हासिल होता यदि उसमें बेजोड़ परिपक्वता न होती. यह समझना बहुत मुश्किल है कि ऎसी अद्भुत रचनात्मक ऊर्जा ऎसी किसी लड़की में कैसे मौजूद हो सकती है जो रोज अपने बालों का रंग बदलती हो : कल काला, आज लाल और फिर कल हरा. वह अपने से अधिक उम्र की तमाम देवियों से ज्यादा पुरस्कार, ट्राफी और मानद उपाधियाँ पहले ही जीत चुकी है. आप कह सकते हैं कि वो ठीक वहीं है जहां कि वह चाहती है : बुद्धिमान, असुरक्षित, संकोची, प्यारी, अस्पष्ट, भावुक. अपने पेशे में शिखर पर होने के बावजूद वह बस बारान्किला की एक लड़की ही है; वह जहां कहीं भी रहे, मछली के अण्डों और मैनियोक की रोटी के लिए तरसती रहेगी. वह अभी तक अपने सपनों का घर खरीदने का बंदोबस्त नहीं कर पाई है, समुद्र तट पर एक शांत गुप्त स्थान, ऊंची छतों वाला और दो घोड़ों के साथ सुसज्जित. उसे किताबों से प्रेम है, वह उन्हें खरीदती और संजोती है, लेकिन उन्हें पढ़ने के लिए उसे उतना समय नहीं मिल पाता जितना कि वह चाहती है. वह हवाईअड्डों पर त्वरित विदाई के बाद पीछे छूट गए दोस्तों को याद तो करती है मगर उसे यह भी पता होता है कि उनसे फिर मिलना इतना आसान न होगा.    

   अपने द्वारा कमाए गए पैसों के बारे में, वह बताती है "यह उससे ज्यादा है जितना कि मैं क़ुबूल करती हूँ, लेकिन उससे कम जितना कि लोग सोचते हैं." संगीत सुनने की उसकी सबसे पसंदीदा जगह कार के भीतर है, जोर से बजता हुआ और शीशे पूरे चढ़े हुए ताकि किसी और को इससे दिक्कत न हो. "यह ईश्वर से बात करने के लिए सबसे आदर्श जगह है, खुद से बात करने और समझने की कोशिश करने के लिए भी." वह टेलीविजन से नफरत करती है. उसके अनुसार उसका सबसे बड़ा विरोधाभास अनंत जीवन में उसका विश्वास और मौत से उसका असहनीय डर है. 

वह बिना किसी बात को दोहराए एक दिन में 40 इंटरव्यू देने के लिए जानी जाती रही है. उसके पास कला, इस जीवन और अगले जीवन, ईश्वर के अस्तित्व, प्रेम और मृत्यु के बारे में अपने मौलिक विचार हैं. लेकिन उसके साक्षात्कारकर्ताओं और प्रचारकों ने उससे इन विचारों को स्पष्ट करवाने में इतनी मेहनत की है कि अब वह टाल-मटोल की विशेषज्ञ बन चुकी है, ऐसे जवाब देते हुए जो जाहिर करने के लिए कम और छुपाने के लिए ज्यादा उल्लेखनीय होते हैं. वह ऎसी किसी भी धारणा को खारिज करती है कि उसकी प्रसिद्धि अस्थायी है और ऎसी अटकलबाजी पर उत्तेजित हो उठती है कि अत्यधिक प्रयोग उसकी आवाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं. "दिन की चमकीली धूप में, मैं सूर्यास्त के बारे में नहीं सोचना चाहती." हर हाल में, विशेषज्ञों का मानना है कि यह असम्भाव्य है क्योंकि उसकी आवाज में एक सहज प्राकृतिक विस्तार है जिसमें उसके अतिरेकों को बर्दाश्त करने की क्षमता है. बुखार से पीड़ित होते हुए भी उसे गाना पड़ा है ; वह अत्यधिक मेहनत और थकान से होकर भी गुजरी है ; लेकिन इस सबसे उसकी आवाज़ कभी प्रभावित नहीं हुई. "किसी गायक के लिए सबसे बड़ी निराशा," हमारे साक्षात्कार के आखिर में वह बेसब्री से कहती है, "यह है कि संगीत को अपना कैरियर चुनना और फिर सिर्फ इसलिए संगीत में कुछ न कर पाना क्यूंकि आप हमेशा इंटरव्यू ही दे रहे होते हैं."        

   उसका सबसे अनिश्चित विषय प्रेम है. वह इसको ऊंचा दर्जा देती है, इसका आदर्शीकरण करती है, यह उसके गीतों के पीछे की ताकत है मगर बातचीत में वह मजाक में इसकी व्याख्या करती है. "सच तो यह है," वह हँसते हुए कहती है "मैं मरने से भी ज्यादा शादी से डरती हूँ." उसके चार पुरुषमित्र रह चुके बताए जाते हैं और वह चिढ़ाने के अंदाज में स्वीकार करती है कि तीन और भी हैं जिनके बारे में कोई नहीं जानता. यह सभी उसी की उम्र के रहे हैं मगर उसके जितना परिपक्व कोई भी नहीं था. शकीरा उनका जिक्र प्यार से करती है, बिना दर्द के; जैसे उसके लिए वे अल्पायु भूत रहे हों जिन्हें उसने अपनी आलमारी में टांग रखा है. खुशकिस्मती से, हताश होने की कोई जरूरत नहीं है : अगली 2 फरवरी को, कुम्भ राशि में, शकीरा सिर्फ 26 साल की होगी.

(अनुवाद : मनोज पटेल)   
Gabriel Garcia Marquez on Shakira 

Saturday, October 16, 2010

जब ल्योसा ने मार्केज को घूसा जड़ा

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की यह तस्वीर उनके दोस्त राद्रिगो मोया ने 1976 में ली थी. इसके कुछ पहले ही एक मेक्सिकन थियेटर में मारियो वर्गास ल्योसा ने मार्केज को घूसा जड़ दिया था. इस घूसे के निशान इस तस्वीर में बाईं आँख एवं नाक पर देखे जा सकते हैं. इस घटना के लिए राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत कारणों को जिम्मेदार बताया जाता है जिनकी यहाँ चर्चा करना मेरा उद्देश्य नहीं है. यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि 35 साल पहले एक महान लेखक को, जिसे 6 साल बाद नोबेल पुरस्कार मिलना था, एक ऐसे लेखक ने घूसा मारा था जिसे 2010 में नोबेल सम्मान से नवाजा जाना था. इस घटना की वजह से विरक्त होने के पहले यह दोनों महान लेखक अच्छे दोस्त हुआ करते थे, यहाँ तक कि ल्योसा ने अपने दूसरे बेटे का नामकरण भी गाब्रिएल किया था.  

Friday, October 15, 2010

उसने कहा था : गाब्रिएल गार्सिया मार्केज



1 - दुनिया में कोई तुम्हारे आंसुओं के काबिल नहीं है, और अगर कोई होता भी तो वह तुम्हें रोने नहीं देता. 

2 - यह सच नहीं है कि लोग बूढ़े हो जाने की वजह से अपने सपनों का पीछा करना छोड़ देते हैं. वे अपने सपनों का पीछा करना छोड़ देने की वजह से बूढ़े हो जाते हैं. 

3 - बहुत ज्यादा का इंतज़ार करने वाले को बहुत कम की उम्मीद करनी चाहिए. 

4 -  नहीं, अमीर नहीं, मैं पैसे वाला गरीब आदमी हूँ और यह एक ही बात नहीं है. 

5 - अगर खुदा इतवार को आराम न करने लग गया होता तो उसे दुनिया को पूरा करने का वक़्त मिल पाया होता. 

6 - गल्प का आविष्कार उसी दिन हुआ जब जान्स ने घर आकर बीवी को बताया कि उसे तीन दिन देर इसलिए हो गई थी क्योंकि वह व्हेल द्वारा निगल लिया गया था. 

7 - कोई व्यक्ति तब नहीं मरता जब उसे मरना चाहिए, बल्कि तब जब वह मर सकता है. 

8 - हमेशा याद रखो कि एक अच्छी शादी में सबसे अहम् चीज खुशी नहीं, स्थायित्व है. 

9 - ईश्वर में मेरा विश्वास नहीं है, लेकिन मैं उससे डरता जरूर हूँ. 

10 - जरूरत का चेहरा कुत्ते सा होता है. 

11 - उसने बखुशी यह पाया कि कोई स्त्री अपनी संतान से सिर्फ अपनी संतान होने की वजह से नहीं, बल्कि उस दोस्ताने की वजह से प्यार करने लगती है जो उन्हें पालते-पोसते हुए विकसित हो जाता है. 

12 -  मधुमेह का सबसे कारगर इलाज़ गरीबी है. 

13 - यह दुनिया कितनी वाहियात है जहाँ आदमी पहले दर्जे में सफ़र करते हैं और किताबें माल-डिब्बे में. 

14 - प्यार करने के लिए हमेशा कुछ न कुछ बचा रह ही जाता है. 

15 - विवेक हमें तब हासिल होता है जब वह किसी काम का नहीं रह जाता. 

16 - सच्चा दोस्त वह है जो आपका हाथ पकड़े और दिल को छू ले. 

17 - अक्सर युद्ध का पहला शिकार आज़ादी होती है. 

18 - सब लोगों के पास तीन किस्म की जिंदगियां होती हैं : सार्वजनिक, निजी और गोपनीय. 

19 - अगर उनके तर्कों को स्वीकार कर लिया जाए तो पागल लोग पागल नहीं रह जाएंगे. 

20 - एक आदमी के पास दो बीवियां होनी चाहिए. एक प्यार करने के लिए और दूसरी उसके बटन टांकने के लिए. 

21 - एक प्रसिद्द लेखक को, जो अभी लिखना चाहता हो, प्रसिद्धि से लगातार खुद की रक्षा करनी पड़ती है. 
(अनुवाद : मनोज पटेल)
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