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Thursday, April 19, 2012

अब्बास कियारोस्तामी : मकड़ा

फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कुछ और कविताएँ...    

 
अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

सूरज उगने के पहले ही 
मकड़ा 
निकल पड़ा है काम पर. 
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रुक जाता है 
मकड़ा 
और ठहरता है पल भर 
उगते सूरज को देखने के लिए. 
:: :: :: 

मकड़े की 
दो दिन की मेहनत 
बरबाद हो जाती है 
बूढ़ी मकानमालकिन की झाड़ू से. 
:: :: :: 

इस बार 
मकड़ा 
शुरू करता है 
बुनाई 
रेशम के पर्दे पर. 
:: :: :: 

Thursday, March 1, 2012

अब्बास कियारोस्तामी : समुद्र पर हो रही है बारिश


ईरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कुछ कविताएँ...   













अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

गाँव के ऊपर 
बिजली की गड़गड़ाहट 
बाधा डालती है 
कुत्ते के भूँकने में. 
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एक औरत की गर्दन से 
लटकती हुई चाभी 
गिर जाती है बेआवाज़ 
धान के खेत में -- 
केतली में कुछ उबल रहा है चूल्हे पर. 
:: :: :: 

हल का फल गोड़ता है धरती को 
और बैल को पता भी नहीं 
क्यों दर्द करने लगी उसकी देह. 
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समुद्र पर हो रही है बारिश -- 
और खेत हैं सूखे हुए. 
:: :: :: 

Friday, February 10, 2012

अब्बास कियारोस्तामी : काक-भगौड़ा

ईरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कुछ और कविताएँ... 

 

अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

गर्मियों की दोपहर में 
अपना ऊनी हैट पहने 
पसीने से तर-बतर है काक-भगौड़ा. 
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बिना डरे 
ढेला मारते हैं गाँव के बच्चे 
काक-भगौड़े के टीन के सर पर. 
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सींचा जा रहा है 
एक काक-भगौड़ा 
खेत के बीचोबीच. 
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एक खाली खेत में 
एक तनहा काक-भगौड़ा 
सर्दियों की शुरूआत में. 
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काक-भगौड़े की तार-तार पोशाक को 
हवा उकसाती है 
नाचने के लिए --
पहला दिन है नए साल का. 
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Manoj Patel Blog

Sunday, February 5, 2012

अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ

ईरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कुछ और कविताएँ... 

 

अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

एक लाल सेब 
हवा में 
सौ चक्कर खाकर 
गिरता है 
एक खिलाड़ी बच्चे के हाथों में. 
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बसंत की हवा में 
फड़फड़ाते हैं एक स्कूल की कापी के पन्ने -- 
सो रहा है एक बच्चा 
अपने नन्हे हाथों पर... 
:: :: :: 

बच्ची और उसकी दादी के बीच के खेल में 
हारती रहती है 
दादी. 
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स्कूली बच्चा 
चलता है पुरानी पटरियों पर 
अनाड़ी ढंग से नक़ल उतारते हुए 
ट्रेन की आवाज़ की. 
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Manoj Patel Blog, padhte-padhte blogspot com 

Tuesday, January 31, 2012

एक फिल्मकार की कविताएँ

प्रसिद्द ईरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की अनोखे चाक्षुष बिम्बों वाली कविताएँ आप इस ठिकाने पर पहले भी पढ़ते रहे हैं. आज कुछ और कविताएँ प्रस्तुत हैं... 


 
 अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

चिंघाड़ते हुए 
रुक जाती है ट्रेन. 

एक तितली सोई हुई है पटरी पर. 
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दाएँ-बाएँ एक निगाह भी डाले बिना 
सड़क पार करता है 
एक सांप. 
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हैरान है 
मधुमक्खी 
एक अनजाने फूल की खुशबू से. 
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एक थके हुए गाँव में 
साल भर की फसल 
एक दिन में काटकर 
लाद दी जाती है एक लड़खड़ाते जानवर की पीठ पर. 
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manojpatel01 

Tuesday, November 29, 2011

अब्बास कियारोस्तामी : दुविधा में मधुमक्खी

मशहूर इरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कुछ कविताएँ आप इस ब्लॉग पर पहले पढ़ चुके हैं, आज प्रस्तुत हैं कुछ और कविताएँ...











अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

हजारों खिले फूलों के बीच 
दुविधा में है 
मधुमक्खी. 
:: :: :: 

धूसर आसमान की दरार से 
रोशनी का एक कतरा 
गिरता है 
बसंत के पहले फूल पर.
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अंकुरित हुआ  
खिला 
मुरझाया  
और जमीन पर गिर पड़ा. 
किसी ने देखा भी नहीं उसे. 
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सींचा जा रहा है 
एक काक-भगौड़ा 
खेत के बीचोबीच
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Manoj Patel 

Wednesday, November 9, 2011

ईरानी फिल्मकार अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ


अब्बास कियारोस्तामी ईरान के प्रसिद्द फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक हैं. बहुमुखी प्रतिभा के धनी कियारोस्तामी फोटोग्राफी और कविताओं में भी खासा दखल रखते हैं. यहाँ उनके संग्रह 'वाकिंग विद द विंड' से कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं.    









अब्बास कियारोस्तामी की कविताएँ 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

पतझड़ की दोपहर :
हौले से गिरती है 
गूलर की एक पत्ती 
और स्थिर हो जाती है 
अपनी परछाईं पर 
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तेज हो रही है हवा 
किस पत्ती की बारी है गिरने की 
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हवा 
खोल देती है 
पुराना दरवाजा 
और शोर मचाते हुए 
बंद करती है उसे 
दस बार 
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कोई 
कुछ भी नहीं कर सकता 
जब आसमान आ जाता है 
बरसने पर 
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खिड़की के रास्ते 
कालीन के फूल पर 
चमकता है पतझड़ का सूरज 
एक मधुमक्खी अपना सर पटकती है खिड़की के शीशे पर 
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कहाँ होगा वह 
क्या कर रहा होगा 
वह जिसे मैं कब का भूल चुका हूँ 
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जैसे हमेशा तय होती है मुलाक़ात मेरी 
किसी शख्स से 
वह आएगा नहीं 
याद नहीं आ रहा उसका नाम 
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वह बड़ा हुआ और बड़ा ही होता गया 
पूरा बड़ा हो गया वह 
फिर छोटा हुआ और छोटा ही होता गया 

आज की रात 
अमावस की रात है 
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Manoj Patel 
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