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Saturday, October 16, 2010

जब ल्योसा ने मार्केज को घूसा जड़ा

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज की यह तस्वीर उनके दोस्त राद्रिगो मोया ने 1976 में ली थी. इसके कुछ पहले ही एक मेक्सिकन थियेटर में मारियो वर्गास ल्योसा ने मार्केज को घूसा जड़ दिया था. इस घूसे के निशान इस तस्वीर में बाईं आँख एवं नाक पर देखे जा सकते हैं. इस घटना के लिए राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत कारणों को जिम्मेदार बताया जाता है जिनकी यहाँ चर्चा करना मेरा उद्देश्य नहीं है. यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि 35 साल पहले एक महान लेखक को, जिसे 6 साल बाद नोबेल पुरस्कार मिलना था, एक ऐसे लेखक ने घूसा मारा था जिसे 2010 में नोबेल सम्मान से नवाजा जाना था. इस घटना की वजह से विरक्त होने के पहले यह दोनों महान लेखक अच्छे दोस्त हुआ करते थे, यहाँ तक कि ल्योसा ने अपने दूसरे बेटे का नामकरण भी गाब्रिएल किया था.  

Friday, October 8, 2010

उसने कहा था : मारियो वर्गास ल्योसा

1 - यदि आप लेखक होने की वजह से मार दिए जाते हैं तो यह आपके जानते, आपके प्रति प्रदर्शित किया गया अधिकतम सम्मान होगा.

2 - यह सच नहीं है कि सिद्धदोष अपराधी जानवरों की तरह रहते हैं, जानवरों को तो घूमने-फिरने के लिए ज्यादा जगह हासिल होती है. 

3 - कितना भी क्षणभंगुर क्यों न हो, उपन्यास कुछ तो है जबकि हताशा कुछ भी नहीं. 

4 - साहित्यिक रचना और राजनीतिक गतिविधि में एक किस्म की असंगति होती है. 

5 - किताब लिखना नितांत अकेलेपन का काम है. आप बाक़ी दुनिया से कटे अपनी धुन और ख्यालों में डूबे हुए होते हैं. 

6 - लेखक अपने खुद के प्रेतों के ओझा होते हैं. 

7 - लेकिन मेरे पास है क्या ? बस वो बातें जो मुझसे कही गईं, और वो जो मैनें दूसरों से कहीं. 

8 - कोई खुद से नहीं लड़ सकता क्योंकि इस लड़ाई में हारने वाला एक ही होगा. 

9 - एक उपन्यास के लिए यह दुर्लभ और लगभग असंभव है कि उसका वाचक एक ही हो. 

10 - विज्ञान अब भी घुप्प अंधेरी गुफा में दिपदिपाती हुई मोमबत्ती ही है.  

11 - जिन्दगी गंदगी का तूफ़ान है जिसमें कला हमारी इकलौती छतरी है. 

12 - श्रृंगारिकता का अपना नैतिक औचित्य होता है क्योंकि इसके अनुसार मेरे लिए मज़ा ही सबकुछ है. यह वैयक्तिक प्रभुसत्ता का वृतांत है. 

13 - आप किसी को सर्जनात्मकता नहीं सिखा सकते - कि अच्छा लेखक कैसे बना जाए. लेकिन आप एक युवा लेखक को अपने अन्दर ही यह पाने में मदद कर सकते हैं कि वह किस तरह का लेखक बनाना चाहेगा. 

14 -  समृद्धि या समता - आपको चुनना होगा. मैं स्वतंत्रता का पक्षधर हूँ - वैसे भी आप वास्तविक समता हासिल नहीं कर सकते. आप बस एक भ्रम के लिए समृद्धि को कुर्बान कर देते हैं. 

(अनुवाद : मनोज पटेल)
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