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Thursday, June 27, 2013

जॉर्ज कार्लिन : उसने कहा था

जार्ज कार्लिन (12 मई, 1937 -- 22 जून 2008) अमेरिकी हास्य अभिनेता और व्यंग्यकार थे. अपने कामेडी एल्बमों के लिए उन्होंने पांच ग्रैमी अवार्ड जीते थे. 2008 में उन्हें मार्क ट्वेन पुरस्कार से नवाजा गया. 

उसने कहा था : जार्ज कार्लिन 
(प्रस्तुति/अनुवाद : मनोज पटेल) 
 
कुल मिलाकर साहित्य सच को छुपाने का एक औजार है. 
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कामिक्सों में बाईं तरफ वाला इंसान हमेशा पहले बोलता है. 
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जिस समय आप जोर से ब्रेक लगाते हैं, उस समय आपकी जिंदगी आपके पैर के हाथ में होती है.  
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क्या आपने कभी गौर किया है कि आपसे धीमे गाड़ी चला रहा शख्स बेवकूफ होता है और आपसे तेज चला रहा शख्स पागल? 
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तुम बंदर को अपनी पीठ से उतार ले गए हो तो इसका यह मतलब नहीं कि सर्कस शहर से जा चुका है. 
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बीती रात मैंने एक अच्छे फेमिली रेस्टोरेंट में खाना खाया. हर मेज पर कोई न कोई बहस छिड़ी थी. 
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वह परिपूर्ण कैसे हो सकता है? उसकी बनाई हर चीज तो मर जाती है. 
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हवाई जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने पर जब ब्लैक बाक्स को कभी कोई नुकसान नहीं पहुँचता तो पूरा हवाई जहाज उसी चीज से क्यों नहीं बनाया जाता? 
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हर कोई एक ही भाषा में मुस्कराता है. 
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घर आपका सामान रखने की एक जगह भर होता है जबकि आप और सामान लाने के लिए बाहर गए रहते हैं. 
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बुढ़ापे की एक सबसे अच्छी बात यह है कि आप हर तरह के सामाजिक दायित्वों से सिर्फ यह कहकर छुट्टी पा सकते हैं कि मैं बहुत थक गया हूँ. 
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नास्तिकता एक नान-'प्राफेट' आर्गनाइजेशन है. 
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सातवें आसमान की चर्चा ज्यादा होती है, मगर असल में छठवाँ आसमान सस्ता, कम भीड़-भाड़ और मनमोहक नज़ारे वाला है. 
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लोग इसे अमेरिकन ड्रीम इसलिए कहते हैं क्योंकि इस पर विश्वास करने के लिए नींद में होना जरूरी है. 
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"नो कमेन्ट" एक कमेन्ट है. 
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यदि कोई व्यक्ति हमेशा मुस्कराता रहता है तो शायद वह कोई ऐसी चीज बेच रहा है जो काम नहीं करती. 
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धर्म जूते की एक जोड़ी की तरह होता है... आप अपने नाप का ले लीजिए मगर मुझे अपना जूता पहनाने की कोशिश मत करिए. 
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कुछ लोग गिलास को आधा भरा देखते हैं और कुछ लोग आधा खाली. मैं उसे एक ऐसे गिलास के रूप में देखता हूँ जो अपनी जरूरत से दुगने आकार का है. 
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किसी को एक मछली दे दीजिए तो वह उसे एक दिन खाएगा. उसे मछली पकड़ना सिखा दीजिए तो वह एक नाव में बैठकर सारा दिन बीयर पीता रहेगा. 
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क्या किसी रेस्टोरेंट में स्मोकिंग सेक्शन बनाना उसी तरह नहीं है जैसे किसी स्विमिंग पूल में मूतने का सेक्शन बनाना? 
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Wednesday, May 1, 2013

फ्रेडरिक नीत्शे : उसने कहा था


उसने कहा था के क्रम में आज फ्रेडरिक नीत्शे के कुछ कोट्स... 

उसने कहा था  : फ्रेडरिक नीत्शे  
(अनुवाद : मनोज पटेल) 


मेरा अकेलापन लोगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर निर्भर नहीं करता; बल्कि मैं तो ऐसे लोगों को नापसंद करता हूँ जो मुझे सच्ची सोहबत दिए बिना मेरा अकेलापन हर लेते हैं. 

तुम्हारा अपना रास्ता है और मेरा अपना. रही बात ठीक रास्ते, सही रास्ते और इकलौते रास्ते की, तो उसका अस्तित्व नहीं है. 

आस्था : यह जानने की इच्छा न होना कि सच क्या है. 

स्वर्ग से सभी मजेदार लोग अनुपस्थित हैं. 

प्रेम में हमेशा कुछ पागलपन होता है. मगर पागलपन में भी हमेशा कुछ तर्क होता है. 

प्रेम अँधा होता है; दोस्ती अपनी आँखें बंद कर लेती है. 

मेरी अभिलाषा है कि मैं दस वाक्यों में वह बात कह दूँ जो दूसरे लोग एक पूरी किताब में कहते हैं. 

व्यक्तियों में मूर्खता अपवाद स्वरूप ही होती है; लेकिन समूहों, दलों, राष्ट्रों और कालखंडों में वह नियम होती है. 

क्या मनुष्य, ईश्वर की एक भारी भूल है? या ईश्वर, मनुष्य की एक भारी भूल है? 

सर्वश्रेष्ठ लेखक वही होगा जो लेखक बनकर शर्मिंदा हो. 
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Tuesday, July 10, 2012

ग्राउचो मार्क्स : उसने कहा था

ग्राउचो मार्क्स के नाम से जाने जाने वाले जूलियस हेनरी मार्क्स (२ अक्टूबर १८९० - १९ अगस्त १९७७) अमेरिकी हास्य कलाकार एवं अभिनेता थे. 'उसने कहा था' के क्रम में प्रस्तुत हैं आज उनके कुछ कोट्स...   

 
उसने कहा था : ग्राउचो मार्क्स 
(प्रस्तुति एवं अनुवाद : मनोज पटेल) 

हालांकि आमतौर पर लोग इस बात को जानते हैं, पर मुझे लगता है कि यह जताने का समय आ गया है कि मैं बहुत कम उम्र में पैदा हो गया था. 

मैंने तार भेजकर क्लब से कहा, "कृपया मेरा इस्तीफा मंजूर कर लें. मैं ऐसे किसी क्लब से नहीं जुड़ना चाहता जो मेरे जैसे शख्स को सदस्य के रूप में स्वीकार कर ले."  

अपने सबसे अच्छे दोस्त की नाकामयाबी पर कोई भी पूरी तौर पर दुखी नहीं होता. 

मेरे पास कोई तस्वीर नहीं है. मैं तुम्हें अपने पैरों के निशान देता हूँ, मगर वे ऊपर हैं, मेरे मोजों में. 

टेलीविजन को मैंने बहुत शिक्षाप्रद पाया. जब भी कोई उसे चालू करता है मैं दूसरे कमरे में जाकर कोई कायदे की किताब पढ़ता हूँ. 

न्याय के लिए सैन्य न्याय वही है जो संगीत के लिए सैन्य संगीत है. 

अपने नाक-नक्श उसने अपने पिता से पाए हैं. वे एक प्लास्टिक सर्जन हैं. 

ये मेरे सिद्धांत हैं, और यदि ये आपको पसंद नहीं... ठीक है, और भी हैं मेरे पास. 

तुम्हारी किताब उठाते ही, जब तक मैंने उसे रख नहीं दिया, हँसते-हँसते मेरे पेट में बल पड़ गए. किसी दिन मैं उसे पढ़ने का भी इरादा रखता हूँ. 

सुखी दाम्पत्य की चाह रखने वाले पति को अपना मुंह बंद रखना और चेकबुक खुली रखना सीख लेना चाहिए. 

मुझे अपना सिगार पसंद है, मगर कभी-कभी मैं उसे अपने मुंह में से निकाल भी दिया करता हूँ. 

अगर कोई काली बिल्ली तुम्हारा रास्ता काट जाए तो इसका मतलब है कि वह कहीं जा रही है. 

यह चाहे जो हो, मैं इसके खिलाफ हूँ. 

या तो यह आदमी मर चुका है या मेरी घड़ी बंद हो गई है. 

मैं हर तरह के पूर्वाग्रहों से मुक्त हूँ. मैं सबसे एक बराबर नफरत करता हूँ. 

विवाह एक अद्भुत संस्था है... मगर एक संस्था में रहना कौन चाहता है? 

मैं छ और सालों तक लोलिता  पढ़ना टाल दूंगा जब तक कि वह 18 की नहीं हो जाती. 

अगली बार जब मैं तुमसे मिलूँ, याद दिला देना कि मुझे तुमसे बात नहीं करनी है. 

अस्पताल का बिस्तर ऎसी खड़ी हुई टैक्सी की तरह होता है जिसका मीटर चल रहा हो. 

इससे पहले कि मैं बोलूँ, मुझे कुछ जरूरी बात कहनी है. 

हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री होती है, और उस स्त्री के पीछे उसकी पत्नी. 

सभी लोग एक जैसे पैदा होते हैं... सिवाय रिपब्लिकनों और डेमोक्रेटों के. 

हँसो तो तुम्हारे साथ पूरी दुनिया हँसती है, रोओ तो शायद तुम गलत चैनल देख रहे हो. 
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Saturday, April 28, 2012

अडोनिस : उसने कहा था


इस ब्लॉग पर आप सीरियाई कवि अडोनिस की कविताएँ पढ़ते रहे हैं. इस ब्लॉग की ५०० पोस्ट पूरी होने के मौके पर आज प्रस्तुत हैं उनकी कविताओं से कुछ कोट्स...

उसने कहा था : अडोनिस 

(अनुवाद एवं प्रस्तुति : मनोज पटेल)

मैं नहीं, यह पृथ्वी है गुमशुदा
जिस पर मैं रहता हूँ. 
               * * *

अगर मैं कोई बादल होता,
चरवाहों के ऊपर से गुजरता बसंत में 
और प्रेमियों के लिए होता एक तम्बू की तरह.
               * * * 

वह पहनता है युद्ध की वर्दी 
और दिखावा करता है विचारधारा का लबादा पहन. 
दरअसल वह एक सौदागार है
कपड़ों का नहीं, लोगों का.  
                 * * *           

कल मर गया वह फूल 
जिसने लालच दिया था हवा को 
अपनी खुशबू फैलाने का.
                 * * *

अब सूरज नहीं उगता.
वह कफ़न ओढ़ लेता है तिनके का 
और गायब हो जाता है.
                 * * *

नाउम्मीदी, मैं तुम्हें 
तुम्हारे असली नाम से पुकारता हूँ.
हम कभी अजनबी नहीं रहे, मगर 
मैं इन्कार करता हूँ तुम्हारे साथ चलने से.
               * * * 

हरी पत्तियों से गूंथ लो अपनी चोटियाँ, मेरे बच्चों,
अब भी कविताएँ हैं हमारे बीच.
हमारे पास समुन्दर है 
और अपने ख्वाब.
               * * *

एक ही जैसी होती है सूरज और मोमबत्ती की रोशनी 
दिल के अँधेरे में.
               * * *

क्या बदसूरती से मुक्त होकर 
दुनिया और खूबसूरत हो जाएगी?
               * * *

क्या मैं यह कहूं कि उसकी ज़िंदगी एक शब्द थी,
मगर सिर्फ उसकी मौत ही उसे कुछ मायने दे सकती थी.
                * * *  

क्या लेखन भी एक रेत घड़ी है?
                * * *

न्यूयार्क एक स्त्री है 
एक हाथ में एक फट्टी थामे हुए 
जिसे इतिहास लिबर्टी कहता है,
और दूसरे हाथ से गला घोंटते हुए पृथ्वी का.
               * * * 

मैनें कहा : "ब्रुकलिन ब्रिज!"
मगर वह तो अब व्हिटमैन और वाल स्ट्रीट को जोड़ता है,
अब वह पुल हो गया है हरी पत्तियों और हरे नोटों के बीच का.
               * * * 

कभी-कभी खेत में उग आती हैं कीलें,
खेत इतना चाहता है पानी को. 
               * * *

सर्दी का अकेलापन 
और गर्मी की क्षणभंगुरता 
जुड़ी है बसंत के पुल से.
               * * * 

खुशी उम्रदराज पैदा होती है 
और मरती है एक बच्चा होकर.
               * * *

जाते हुए 
मैं बंद कर जाता हूँ अपने पीछे 
पृथ्वी का दरवाज़ा.
               * * * 

मैं जा रहा हूँ 
अपने माथे पर निर्वासन का पसीना लिए हुए
और अपनी आँखों में सोती हुई 
एक गुमशुदा कविता के साथ.
               * * * 

कुछ कागज़ लाओ मेरे लिए,
थोड़ी रोशनाई.
... अभी दिल हैं छूने के लिए.
               * * *   

क्या यह कोई ख्वाब है?
क्या वापसी नाम का कोई सफ़र नहीं?
               * * * 

आवाज़ भाषा की सुबह है. 
               * * *

इंसान सतत मृत्यु की एक प्रक्रिया है.
               * * *

मिट्टी एक देंह है 
जो नृत्य करती है 
सिर्फ हवा के साथ. 
               * * * 

एक बार गाया था मैनें : थकता हुआ 
हर गुलाब उसका नाम है 
सफ़र करता हुआ हर गुलाब उसका नाम है. 
          क्या सड़क ख़त्म हो गई? क्या उसने अपना नाम बदल लिया? 
               * * *

कुदरत बूढ़ी नहीं होती.
               * * *

खून सोचता है, देंह लिखती है.
               * * *

धूल एक जंगली घोड़ा है जिसे साधना मुश्किल है.
उसके पैरों के निशान से ढँकी हुईं हैं सड़कें.
               * * * 

रेत को समझने के लिए 
तुम्हें कोई लहर होने की जरूरत नहीं.
               * * *

ऐ रोशनाई की रेल, उसके कागजों पर 
कोई स्टेशन नहीं है.
               * * * 

अपनी बाहें फैला लो.
मैं देखना चाहता हूँ 
उनके बीच 
कांपती हुई अपनी स्मृति. 
               * * * 

कहीं पैठ नहीं है हमारी खामोशी की 
हमारे प्यार की तरह, उस तक भी कोई रास्ता नहीं जाता.  
               * * *

हम घूमते थे अपनी बर्बादी के खंडहरों में, अपनी नादानियों के आईने में 
बेजान कागज़ के शब्दकोषों में  
और कोई निशान नहीं छोड़ते थे हमारे क़दम  
चलो फिर से चलें 
अपने बेहतर दिनों के बगीचे में 
               * * *

कोई पुल नहीं था 
मेरी देह और मेरे ख्वाब के बीच  
इस तरह मैं रहने लगा अपने ख़यालों में 
इस तरह दोस्त बन गए मैं और फ़रेब 
               * * *   

मौत को खूबसूरत बनाना गुनाह है.
               * * *

हम कौन सी जुबान में सूरज को बताएं 
कि उसका उगना एक जख्म है और उसका डूबना एक कब्र.
               * * * 

यह बुढ़ापा नहीं, बचपना है जो तुम्हारे चेहरे को झुर्रियों से भरे हुए है.
               * * *

हवा भी बनना चाहती है 
तितलियों से खींची जाने वाली 
एक गाड़ी.
              * * * 

सूरज जिद करके पहनता है कुहासे का कपड़ा 
मुझसे मिलता है जब वह.
              * * *

ओह, अब मेरी इन्द्रियों को पहले से भी ज्यादा जरूरी है 
पवित्र किताबों को कविता की नजर से पढ़ना.
               * * *

एक सितारा 
अन्तरिक्ष के मैदान में एक पत्थर भी तो है. 
             * * *

"क्या, किधर, कैसे?
बह चुकी हैं सारी हवाएं  
सारी डालियाँ झूम चुकीं उनके साथ,
पर तुम नहीं आई."
              * * *  

तुम्हें पढ़ता है आसमान 
जब मौत तुम्हें लिख देती है. 
              * * *

वर्तमान एक बूचड़खाना है 
और सभ्यता एक नाभिकीय नरक.
               * * * 

ज़िंदगी, मैं तुम्हारी, या तुमसे कोई शिकायत नहीं करना चाहता.
सिर्फ यह कहना चाहता हूँ : मैं अब भी तुमसे प्यार करता हूँ.
               * * * 

इंसान एक देह नहीं बल्कि एक संख्या है.
हर गुजरते दिन के साथ 
कुछ घटता जाता है उसमें. 
               * * *

रेत, मैं तुम्हें मुबारकबाद देता हूँ. 
सिर्फ तुम ही ढाल सकती हो 
पानी और मरीचिका को 
एक ही प्याले में. 
             :: :: :: 

Thursday, February 2, 2012

पाब्लो पिकासो : उसने कहा था

उसने कहा था के क्रम में आज पाब्लो पिकासो के कुछ कोट्स...

 
उसने कहा था : पाब्लो पिकासो 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

सभी बच्चे कलाकार होते हैं. समस्या तो यह है कि बड़े होने के बाद भी कैसे कलाकार बना रहा जाए. 

हमें क्या पेंट करना है, जो चेहरे पर है, जो चेहरे के भीतर है, या जो उसके पीछे है? 

कला एक झूठ है जो सत्य जानने में हमारी सहायता करती है. 

कला अनावश्यक का निरसन है. 

कला आत्मा से रोजमर्रा की ज़िंदगी के गर्दो-गुबार को धो डालती है. 

खराब कलाकार नक़ल करते हैं, अच्छे कलाकार चोरी. 

कम्प्यूटर बेकार होते हैं. वे आपको सिर्फ उत्तर दे सकते हैं. 

सृजन का हर कार्य पहले विध्वंस का कार्य होता है. 

हर चीज एक करिश्मा है. यह करिश्मा ही है कि नहाते समय कोई चीनी के दाने की तरह गल नहीं जाता. 

हर वह चीज वास्तविक है जिसकी तुम कल्पना कर सकते हो.  

मैं तलाश नहीं करता, मैं पा जाता हूँ. 

काश कि हम अपना दिमाग बाहर निकालकर सिर्फ अपनी आँखों का इस्तेमाल कर सकते. 

जवान होने में बहुत वक़्त लगता है. 

पेंटिंग डायरी लिखने का ही दूसरा तरीका है. 

कुछ पेंटर सूरज को एक पीले धब्बे में बदल देते हैं, अन्य पेंटर एक पीले धब्बे को सूरज में. 

"अच्छी" समझ रचनात्मकता की सबसे बड़ी दुश्मन होती है. 

आजकल की दुनिया के मायने समझ में नहीं आते. तो मैं ऎसी पेंटिंग क्यों बनाऊँ जो समझ में आएं? 

हम बूढ़े नहीं होते जाते, हम पकते जाते हैं. 

इंसान के चेहरे को सही ढंग से कौन देखता है: फोटोग्राफर, आईना, या पेंटर? 

काम मनुष्य के लिए एक आवश्यकता है. मनुष्य ने ही अलार्म घड़ी का आविष्कार किया. 

नौजवानी की कोई उम्र नहीं होती. 
                                                          :: :: :: 
Manoj Patel, parte parte, parhte parhte, padte padte  

Monday, September 19, 2011

दून्या मिखाइल : उसने कहा था



'उसने कहा था' के क्रम में आज दून्या मिखाइल के कुछ कोट्स... 



उसने कहा था : दून्या मिखाइल 
(अनुवाद एवं प्रस्तुति : मनोज पटेल)


1. 
सिर्फ पत्थर ही हैं जिनके ख्वाब नहीं चिटकते 
सिर्फ पत्थर के ही दिल टिकते हैं. 

2. 
क्या मृतकों को खुदकशी करने और 
इस तरह पृथ्वी पर वापस आने का हक़ है ? 

3. 
हम दोनों को  (पृथ्वी और मुझे)
भरोसा है कि एक ने दफना रखा है दूसरे को अपने भीतर.
मैं सोचती हूँ कि कौन दफनाया गया होगा पहले ?

4. 
-- जीत क्या है ?
-- वे हमारे नसीब में हार लिखती हैं.

5. 
कल, चाँद गिर पड़ा तंदूर में 
और सिंक गया रोटी के साथ. 

6. 
हम सोते हैं कतार में खड़े-खड़े 
और विशेषज्ञ उपाय सोचते हैं सीधी खड़ी कब्रों के लिए 
क्योंकि खड़े-खड़े ही मर जाना है हमें. 

7. 
-- पुल क्या होता है ?
-- पुल एक माँ है अपने बच्चे पर झुकी हुई 
जो गिर पड़ा है मुरझाई पत्तियों के साथ.

8. 
दुनिया मानती है लोकतंत्र को,
इसलिए यह मृतकों को देती है 
शहर में भटकने की आजादी.

9. 
मुझे पता है कि तुम्हारे हाथ खाली हैं.
जानती हूँ कि अभी कुछ नहीं है करने के लिए तुम्हारे हाथों के पास.
मगर इससे ठीक नहीं साबित हो जाता उन्हें ताली बजाना सिखाना.

10. 
तुम रात की तरह तो नहीं हो, फिर अन्धेरा तुम्हें क्यों चाहता है ?

11. 
जब भाषा मर जाती है,
धरती के लोग इसे शब्दकोषों में दफना देते हैं. 

12. 
मगर यह पल है कहाँ ?
यह गायब हो जाता है हमारे बोलते ही.
अपनी जगह दूसरे पल को दे देता है 
और अतीत हो जाता है.
दुनिया हमेशा ही भूतकाल में रहती है.

13. 
जब जंग शुरू हुई मैनें शतरंज खेलना छोड़ दिया :
कोई मतलब नहीं था इतने सारे प्यादों को कुर्बान करने का 
सिर्फ एक बादशाह को बचाने के लिए. 

14.
जब बरस रही हो खुदा की बारिश 
मेरे दोस्त 
खामोश रहो थोड़ी देर 
कि कहीं भीग न जाएं बातें !

15.
वक़्त ठहर गया बारह बजे
और इसने चकरा दिया घड़ीसाज को.
कोई गड़बड़ी नहीं थी घड़ी में.
बस बात इतनी सी थी की सूइयां
भूल गईं दुनिया को, हमआगोश होकर. 


16.  
- मैं पृथ्वी की तस्वीर बनाना चाहता हूँ
- बनाओ, मेरे बच्चे. 
- मैनें बना लिया.
- और यह कौन है ?
- वह मेरी दोस्त है.
- और पृथ्वी कहाँ है ?
- उसके हैण्डबैग में. 


17.
किसी मोची के हाथों 
मुट्ठी भर कील ही तो है ज़िंदगी.


18.
किसी हाईकू कविता की तरह
मेरे सूटकेस ने समेट दी मेरी दुनिया 
तस्वीरों और चिट्ठियों 
एक कापी और एक पेन्सिल में. 
                    :: :: :: 

Monday, September 5, 2011

सल्वाडोर डाली : उसने कहा था

'उसने कहा था' के क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज सल्वाडोर डाली के कोट्स...


















उसने कहा था :सल्वाडोर डाली 
(अनुवाद : मनोज पटेल)
 

मैं धूम्रपान नहीं करता इसलिए मैनें मूंछें बढ़ाने का फैसला किया -- मूंछें बढ़ाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. 

परिपूर्णता से मत डरो - वह तुम कभी हासिल नहीं कर पाओगे.

एक खूबसूरत औरत वह है जो तुम्हें घटिया समझे और जिसकी कांख में बाल न हों. 

मैं नशीली दवाएं नहीं लेता. मैं खुद ही नशीली दवा हूँ. 

छः साल की उम्र में मैं खानसामा बनना चाहता था और सात साल की उम्र में नेपोलियन. तबसे मेरी महात्वाकांक्षा लगातार बढ़ती ही जा रही है. 

भ्रम का निवारण नहीं, उसे फैलाना ज्यादा जरूरी है.

हर सुबह जागने पर मुझे फिर से एक परमानंद का एहसास होता है : सल्वाडोर डाली होने का एहसास. 

एक सच्चा कलाकार वह नहीं है जो प्रेरित है, बल्कि वह है जो दूसरों को प्रेरित करता है. 

मुझमें और किसी पागल में इकलौता अंतर यह है कि मैं पागल नहीं हूँ.   

कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं संतुष्टि की अधिक खुराक से मर जाऊंगा.

हमेशा से मेरे प्रभाव का रहस्य यही रहा है कि वह रहस्य ही बना रहा. 

हशीश सभी को लेना चाहिए, मगर सिर्फ एक बार.

सफलता का थर्मामीटर सिर्फ विक्षुब्ध लोगों की ईर्ष्या है. 

सुन्दरता या तो खाने लायक हो या फिर हो ही न. 

जो होने लायक है, उसका कितना कम होता है. 

जो किसी की नक़ल नहीं करना चाहते, वे खुद भी कुछ बना नहीं पाते.

जब मैं चित्र बनाता हूँ, दहाड़ें मारता है समुद्र. बाक़ी लोग छपछपाते हैं गुसलखाने में.  

प्यार करना और नष्ट हो जाना बेहतर है बजाय हर हफ्ते चालीस किलो कपड़ा धुलने से. 

कोई चीज या तो आसान होती है या नामुमकिन.

मैं अजीब नहीं हूँ, मैं तो बस सामान्य हूँ.

अतिशयोक्ति ही वह इकलौती चीज है जो दुनिया में कभी भी पर्याप्त नहीं हो पाएगी.
                                                :: :: ::

Monday, November 8, 2010

उसने कहा था : निज़ार कब्बानी



1- तुम्हारे आने से पहले
    गद्द्य थी दुनिया 
    कविता तो अब हुई है पैदा. 

2 - कालीन पर तुम्हारे पाँव 
      नाक-नक्श हैं
      कविता के.  

3 - जब प्यार करता हूँ किसी औरत को 
      पेड़ सारे दौड़े चले आते हैं मेरी ओर
      नंगे पाँव.

4 - तुम्हारी खातिर मेरा प्यार जो 
     लफ़्ज़ों से है परे
     फैसला किया है मैनें
     खामोश रहने का.  

5 - अगर कोई बादल देता है तुम्हें
      मैं तुम्हें बारिश दूंगा.

6 - हज़ारों औरतों को मारकर मेरे भीतर
     तुम बन बैठी हो मलिका. 

7 - इनके अक्स में गुम हो जाती है मेरी लिखावट
     आईनों को याददाश्त कहाँ होती है.

8 - उतार फेंको अपने कपड़े 
      सदियों से करिश्मा नहीं हुआ कोई.

9 - जिस दिन तुमने क़ुबूल किया मेरा प्यार 
      उसी दिन हुआ मेरा जन्म. 

10 - जन्म और मृत्यु की तरह 
        नामुमकिन है 
        तुम्हारे प्रेम का दुहराव.

11 - जब प्यार कर रहा हो कोई तो 
        कैसे इस्तेमाल कर सकता है लफ्ज़ पुराने. 

12 - क्या तुम सुनती हो मेरी बातें 
        जब खामोश होता हूँ मैं ?

13 - कविता ज्यादा अहम है नोटबुक से 
        होंठों से ज्यादा अहम है चुम्बन. 

14 - किसने छिपा रखी हैं हज़ारो कवितायेँ
        तुम्हारी आँखों की बंद किताब में ? 

15 - जो न होतीं तुम्हारी आँखें 
        कैसी होती यह दुनिया ? 

16 - सबकुछ है बहसतलब
        तुम्हारे नारीत्व के सिवाय. 

17 - जब तुम हंसती हो मेरी जान 
       मैं भूल जाता हूँ आसमान को.  

18 - तुम्हारी आँखों और अपने गम के सिवाय 
        इस दुनिया में और कुछ नहीं है मेरे पास. 

19 - क्या लिखूं प्यार के बारे में प्रिय 
        बस याद है इतना 
        कि सुबह जब जागा नींद से 
        खुद को पाया किसी शहजादे सा. 

20 - गवाह हूँ इसका कि 
        कोई और स्त्री न फैला सकी मेरा बचपन 
        पचास की उम्र तक. 

22 - नंगे पाँव हो तुम 
        क्या पता है तुम्हें 
        एक स्त्री बदल सकती है इतिहास की लय 
        नंगे पाँव. 


 (अनुवाद : Manoj Patel)
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