Sunday, November 6, 2011

टॉमस ट्रांसट्रोमर : काले पोस्टकार्ड

टॉमस ट्रांसट्रोमर की एक और कविता...


काले पोस्टकार्ड : टॉमस ट्रांसट्रोमर 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

1
व्यस्तता से भरा हुआ कैलेण्डर, भविष्य अज्ञात. 
सन्देश गुनगुनाता हुआ एक बेवतन लोक गीत को. 
सीसे की तरह स्थिर समुद्र पर गिरती हुई बर्फ. गोदी पर 
                         कुश्ती लड़ती हुईं परछाईयाँ. 


ऐसा होता है ज़िंदगी के बीच में कभी कि मौत आती है 
इंसान के नाप लेने की खातिर. भुला दिया जाता है 
यह आगमन और चलती रहती है ज़िंदगी. 
                         मगर सूट सिल जाता है चुपचाप.   
                    :: :: :: 
तोमास त्रांसत्रोमर की कविताएँ 

Saturday, November 5, 2011

रोक डाल्टन : बुरी खबर

आज फिर से रोक डाल्टन की एक कविता...









अखबार की एक कतरन पर बुरी खबर : रोक डाल्टन 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

इन दिनों मेरे दोस्तों की मौत होती है  
तो सिर्फ उनके नाम मर जाते हैं. 

इस सड़े से बिल में 
उम्मीद करूँ भी तो कैसे 
अखबारी कागज़ से कुछ ज्यादा जज्ब करने की, 
उन नाजुक काले अक्षरों की जगरमगर को 
कैसे समझूं स्मृतियों में चुभते किसी तीर से ज्यादा ?

सिर्फ वे ही इज्जत बख्श सकते हैं लाशों को 
जो रहते हैं जेल से बाहर, 
प्रियजनों की लाशों से लिपटकर 
सिर्फ वे ही कम कर सकते हैं अपना गम, 
कब्र को खुरच सकते हैं अपने नाखूनों से 
और आंसुओं से नम कर सकते हैं उसकी मिट्टी को.

यह सब नहीं कर पाते हम जैसे जेल के कैदी :
हम बस सीटी बजाते हैं अपने होंठों से 
खबर के असर को कम करने के लिए. 
                    :: :: :: 
Manoj Patel's Blog, Manoj Patel Translations रॉक डाल्टन 

Friday, November 4, 2011

दून्या मिखाइल : खेल


दून्या मिखाइल की कविता...



खेल : दून्या मिखाइल 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

वह एक मामूली प्यादा है.
हमेशा झपट पड़ता है अगले खाने पर.
वह बाएँ या दाएं नहीं मुड़ता 
और पीछे पलटकर भी नहीं देखता.
वह एक नासमझ रानी द्वारा संचालित होता है 
जो बिसात के एक सिरे से दूसरे सिरे तक चल सकती है 
सीधे या तिरछे. 
वह नहीं थकती, तमगे ढोते 
और ऊँट को कोसते हुए. 
वह एक मामूली रानी है 
एक लापरवाह राजा द्वारा संचालित होने वाली 
जो हर रोज गिनता है खानों को 
और दावा करता है कि कम हो रहे हैं वे.
वह सजाता है हाथी और घोड़ों को 
और एक सख्त प्रतिद्वंदी की करता है कामना. 
वह एक मामूली राजा है 
एक तजुर्बेकार खिलाड़ी द्वारा संचालित होने वाला 
जो अपना सर घिसता है 
और एक अंतहीन खेल में बर्बाद करता है वक़्त अपना.
वह एक मामूली खिलाड़ी है 
एक सूनी ज़िंदगी द्वारा संचालित होने वाला 
किसी काले या सफ़ेद के बिना.
वह एक मामूली ज़िंदगी है 
एक भौचक्के ईश्वर द्वारा संचालित होने वाली 
जिसने कोशिश की थी कभी मिट्टी से खेलने की. 
वह एक मामूली ईश्वर है.
उसे नहीं पता कि 
कैसे छुटकारा पाया जाए 
अपनी दुविधा से. 
                    :: :: ::

(नई बात ब्लॉग पर पूर्व प्रकाशित)
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