Friday, April 5, 2013

हेनरिक डोपट की कविता

डेनमार्क के कवि हेनरिक डोपट (Henrik Nordbrandt) की एक कविता... 

ढलते मार्च के दिन : हेनरिक डोपट 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

दिन एक दिशा में चलते हैं 
और चेहरे उल्टी दिशा में. 
बराबर वे उधार लिया करते हैं एक-दूसरे की रोशनी. 

कई सालों बाद मुश्किल हो जाता है पहचानना 
कि दिन कौन से थे 
और कौन से चेहरे... 

और दोनों चीजों के बीच की दूरी 
और भी दुर्गम लगती जाती है 
दिन ब दिन और चेहरा दर चेहरा 

यही मैं देखता हूँ तुम्हारे चेहरे में 
ढलते मार्च के इन चमकीले दिनों को. 
                    :: :: :: 
(Nordbrandt का उच्चारण यहाँ से) 

Tuesday, April 2, 2013

ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट : स्वर्ग से रपट

ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट की एक और कविता... 

स्वर्ग से रपट : ज़िबिग्न्यू हर्बर्ट 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

स्वर्ग में हफ्ते में तीस घंटे निर्धारित हैं काम के 
तनख्वाहें ऊँची हैं और कीमतें गिरती जाती हैं लगातार 
शारीरिक श्रम थकाऊ नहीं होता (गुरुत्वाकर्षण कम होने की वजह से) 
टाइपिंग से ज्यादा मुश्किल नहीं है लकड़ी चीरना 
सामाजिक व्यवस्था सुदृढ़ है और शासक बुद्धिमान 
सच में किसी अन्य देश से बेहतर है जीवन स्वर्ग में 

शुरू में इसे अलग होना था 
आभामंडल कीर्तन-मंडली और अमूर्तन के दर्जे 
मगर वे ठीक से अलग नहीं कर सके 
आत्मा को शरीर से, इसलिए वह यहाँ आ गई 
चर्बी की एक बूँद और मांसपेशी के एक रेशे के साथ 
जरूरी था नतीजों का सामना करना 
मिट्टी का एक कण मिलाना परम के एक कण में 
सिद्धांत से एक और विचलन, आखिरी विचलन 
सिर्फ जॉन ने इसे पहले ही भाँप लिया था: फिर से धरनी पड़ेगी तुम्हें देह 

बहुत लोग नहीं देख पाते ईश्वर को 
सिर्फ उन लोगों के लिए है वह जिनमें होती है 100 प्रतिशत आत्मा 
बाक़ी सुनते हैं चमत्कारों और प्रलयों की घोषणाओं को 
किसी दिन सबको दिखेगा ईश्वर 
कोई नहीं जानता कि कब होगा ऐसा 

फिलहाल हर शनिवार की दोपहर 
मधुरता से गूंजते हैं साइरन 
और कारखानों से निकल पड़ते हैं अलौकिक मजदूर 
काँखों में अजीब ढंग से दबाए अपने डैने, वायलिनों की तरह 
                            :: :: :: 

Monday, April 1, 2013

रॉबर्तो बोलान्यो की सलाह

कहानी लिखने की कला पर रॉबर्तो बोलान्यो की सलाह... 
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"अब चूंकि मैं चौवालिस साल का हो चुका हूँ, इसलिए कहानी लिखने की कला पर कुछ सलाह दूँगा. (1) एक बार में एक ही कहानी पर मत काम करो. अगर तुम एक समय में एक ही कहानी पर काम करोगे तो ईमानदारी से मरने के दिन तक एक ही कहानी लिखते रह जाओगे. (2) सबसे अच्छा तो यह है कि एक समय में तीन या पांच कहानियाँ लिखी जाएँ. अगर तुम्हारे पास बूता है तो एक समय में नौ या पंद्रह लिखो. (3) ध्यान रखो: एक समय में दो कहानियाँ लिखने का लालच उतना ही खतरनाक है जितना कि एक समय में एक कहानी लिखने की चेष्टा.........." 

रॉबर्तो बोलान्यो 
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