शान हिल की कुछ और ट्विटर कहानियां...

शान हिल की ट्विटर कहानियाँ
(अनुवाद : मनोज पटेल)
मेरे मम्मी-डैडी ने मुझे नाक से कीबोर्ड खटखटाते देख लिया. मम्मी रोने लगीं. डैडी ने यह महसूस कर मेरे हाथों की हथकड़ियाँ खोल दीं कि लेखक होने का कोई इलाज नहीं है.
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मुझे गुस्से को काबू करना सिखाने वाली कक्षाएं पसंद नहीं हैं. मुझे कोई परेशानी नहीं है. जब मैंने तुम्हें बस के सामने धक्का दिया तो मैं गुस्से में नहीं था. बात बस इतनी है कि तुम मुझे पसंद नहीं.
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तुम्हें पकड़ने के लिए मैं हवाईजहाज से कूद पड़ा. नीचे गिरते समय मुझे लगा कि अगर तुम मुझसे दूर जाने की इतनी ही ख्वाहिशमंद थी, तो मुझे तुम्हें जाने देना चाहिए.
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माता-पिता छोटी-छोटी डेस्कों के सामने बैठे हुए थे. बच्चों ने भूली हुई मस्ती का पाठ पढ़ाकर उन्हें फिर से इंसानों में बदल दिया.
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इक-दूजे के लिए बने वे दोनों अगल-बगल ही रहते हैं मगर कभी एक-दूसरे से मिल नहीं पाएंगे. वे अलग-अलग दुनियाओं में रहते हैं. लड़के की दुनिया फेसबुक है और लड़की की ट्विटर.
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