Thursday, June 6, 2013

शान हिल की ट्विटर कहानियाँ

शान हिल की कुछ और ट्विटर कहानियां... 

शान हिल की ट्विटर कहानियाँ  
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

मेरे मम्मी-डैडी ने मुझे नाक से कीबोर्ड खटखटाते देख लिया. मम्मी रोने लगीं. डैडी ने यह महसूस कर मेरे हाथों की हथकड़ियाँ खोल दीं कि लेखक होने का कोई इलाज नहीं है. 
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मुझे गुस्से को काबू करना सिखाने वाली कक्षाएं पसंद नहीं हैं. मुझे कोई परेशानी नहीं है. जब मैंने तुम्हें बस के सामने धक्का दिया तो मैं गुस्से में नहीं था. बात बस इतनी है कि तुम मुझे पसंद नहीं. 
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तुम्हें पकड़ने के लिए मैं हवाईजहाज से कूद पड़ा. नीचे गिरते समय मुझे लगा कि अगर तुम मुझसे दूर जाने की इतनी ही ख्वाहिशमंद थी, तो मुझे तुम्हें जाने देना चाहिए. 
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माता-पिता छोटी-छोटी डेस्कों के सामने बैठे हुए थे. बच्चों ने भूली हुई मस्ती का पाठ पढ़ाकर उन्हें फिर से इंसानों में बदल दिया. 
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इक-दूजे के लिए बने वे दोनों अगल-बगल ही रहते हैं मगर कभी एक-दूसरे से मिल नहीं पाएंगे. वे अलग-अलग दुनियाओं में रहते हैं. लड़के की दुनिया फेसबुक है और लड़की की ट्विटर. 
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Twitter Stories in Hindi

Wednesday, June 5, 2013

अफ़ज़ाल अहमद सैयद : बर्फ़ानी चिड़ियों का क़त्ल

अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   
बर्फ़ानी चिड़ियों का क़त्ल : अफ़ज़ाल अहमद सैयद 
(लिप्यंतरण : मनोज पटेल) 
 
यह बर्फ़ानी चिड़ियों के क़त्ल की कहानी है 
मगर मैं इसे तुम्हारे जिस्म से शुरू करूँगा 

तुम्हारा जिस्म जंगली जौ था 
जो फ़रोख्त हो गया, चुरा लिया गया या तबाह हो गया 

पहाड़ी बकरियों की ऊन और देवदार के रेशों से बुना लिबास 
मैंने 
कच्चे चमड़े की ढाल और तुम्हारी उँगलियों में मक्नातीस की अंगूठी पर 
ज़िंदा रहने का हलफ़ उठाने के दिन पहना था 

प्यालानुमा आईनों में 
मुख्तलिफ़ रंगों की रेत से बनी एक तस्वीर थी 

"यह मैं हूँ" 
तुमने कहा 
और आईनों से धुआँ निकलने लगा 

तुमने दुनिया की क़दीमतरीन ज़बान में दुआ मांगी 
जो एक गीत और झूठ 
दोनों तरह सुनी गई 
काश तुमने अपने जिस्म को इस कदर दहकाया न होता 

ख़ुदा का आग से पहले का दिन 
हमारे विसाल का दिन था 

जल्द उग आने वाली फसल का ज़माना था 
एक अजनबी ख़ुदा की शबीहें 
पानी को मैला किए जा रही थीं 

जब मैं एक ख़्वाब से दस्तबरदार हुआ 
और अपनी ज़िंदगी के एक हिस्से को 
पानी में घुलते हुए देखा 

क़ब्रिस्तान का दरवाजा 
सिंदूर से सुर्ख़ कर दिया गया था 
और उसके बाद का रास्ता 
हड्डियों से बने मछली पकड़ने के काँटों 
और अदने मोतियों से भरा था 
तुम्हारे जिस्म के सिवा मेरे पास कोई जाल न था 
जिससे डूबती हुई ज़िंदगी को पकड़ सकता 

मैंने तुमसे कहा 
मुझे अपने बालों की दो लटें दो 
और मेरी माँ को उनसे कमान की डोर बटने में मदद 

तुम्हारे इन्कार के बाद 
मेरे मारे जाने की कहानी है 

जो मैं टोकरियाँ बुनने वाली लड़कियों की पलकों और नाखूनों से शुरू करूँगा 
जिन्हें एक तवील क़हत ने 
अपनी टोकरियों में बर्फ़ानी चिड़ियों को क़त्ल कर देने पर मजबूर कर दिया था 
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बर्फ़ानी  :  बर्फ़ की 
फ़रोख्त  :  बिकना 
मक्नातीस  :  चुम्बक 
हलफ़  :  शपथ 
मुख्तलिफ़  :  अलग-अलग 
क़दीमतरीन  :  सबसे पुरानी 
विसाल  :  मिलन 
शबीहें  :  तस्वीरें 
दस्तबरदार  :  विरक्त 
अदने  :  साधारण 
तवील  : दीर्घावधि, लम्बी 
क़हत  :  अकाल 

Saturday, June 1, 2013

अफ़ज़ाल अहमद सैयद : ज़िंदा रहना एक मिकानिकी अजीयत है

अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...   














ज़िंदा रहना एक मिकानिकी अजीयत है : अफ़ज़ाल अहमद सैयद 
(लिप्यन्तरण : मनोज पटेल) 
 
ज़िंदा रहना एक मिकानिकी अजीयत है 
हम समझ सकते हैं 
अपनी शर्मगाहों को गहरा काटकर 
मर जाने वाली लड़कियाँ  
क्यों कोई अलविदाई ख़त नहीं छोड़तीं 
और बच्चों की हड्डियां 
कैसे 
दरख़्त की सब्ज़ टहनी की तरह मुड़ जाती हैं 

यह दरख़्त पाकिस्तान में हर जगह पाया जाता है 

हम जानते हैं 
ज़ियाफ़त की किस मेज पर 
सेबों को हमारे मुल्क के परचम से चमकाया जा रहा है 
मगर 
गवाह चार किस्म के होते हैं 
और फैसला हमेशा साफ़ हुरूफ़ों में लिखा जाता है 

हम उस लड़की की तरह नहीं 
जो रजामंदी देने का मतलब नहीं समझती 
और मलिका की काली ब्रेजियर्स 
और तीन हजार जूतियों को 
चूमने से मुतनफ़्फ़िर है 

हमें दिया गया ज़हर 
हमारे जिस्म से आंसुओं के जरिए ख़ारिज नहीं होगा 

वैनेशियन ब्लाइंड से झाँककर 
हम देख सकते हैं 
आबी भेड़िए किस तरह 
हमारी औरतों को हामिला कर रहे हैं 
और हमारी मुसावातें 
कहाँ हल हो रही हैं 

फिर भी हमारी जिम्मेदारी है 
उस शख्स को,  
जो अपनी उंगलियों के सिरों से 
नज़र न आने वाले धागे निकालने की कोशिश कर रहा है, 
बता दें 
ज़िंदा रहना एक तस्सुवराती अजीयत भी है 
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मिकानिकी  :  यांत्रिक, संवेदनाहीन  
अजीयत  :  यातना 
शर्मगाह  :  जननांग, भग 
सब्ज़  :  हरी 
ज़ियाफ़त  :  अतिथि पूजा, मेहमाननवाज़ी 
हुरूफ़ों  :  अक्षरों 
मुतनफ़्फ़िर  :  नफरत करने वाली, गैररजामंद 
आबी भेड़िए  :  समुद्री भेड़िए 
हामिला  :  गर्भवती 
मुसावातें  :  समीकरण  
तस्स्वुराती  :  काल्पनिक 
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