Sunday, April 14, 2013
Friday, April 12, 2013
चार्ल्स सिमिक की कविता
चार्ल्स सिमिक की एक और कविता...

बेलग्रेड की इसी सड़क पर : चार्ल्स सिमिक
(अनुवाद : मनोज पटेल)
तुम्हारी माँ ले आई थीं तुम्हें
एक इमारत के सुलगते खंडहरों से बाहर
और नीचे रखा था तुम्हें इस फुटपाथ पर
झुलसे हुए चिथड़ों में लिपटी किसी गुड़िया जैसी,
सालों बाद, जहां तुम खड़ी हो इस वक़्त
एक बेघर कुत्ते से बतियाते हुए,
जो आधा छिपा है एक कार के पीछे,
उम्मीद से लबालब उसकी आँखें
जबकि धीमे-धीमे बढ़ता है वह आगे,
तैयार बुरे से बुरे के लिए.
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चार्ल्स सिमिक
Tuesday, April 9, 2013
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की कविता
अफ़ज़ाल अहमद सैयद की एक और कविता...
दरियाए सिंध हमारे दुख बहा क्यों नहीं ले जाता : अफ़ज़ाल अहमद सैयद
(लिप्यान्तरण : मनोज पटेल)
उस तमाम खून से
जो बहा
चार्ल्स नेपियर
अपनी निगाह में बरीउज्जिमा था
जैसा कि डेढ़ सौ साल बाद तक
उसके जानशीन साबित हुए
इसके अलावा भी
सब कुछ उसी तरह था
सिर्फ
जिस्मानी रिमांड में आई हुई ख़वातीन पर
खराब पिसी हुई मिर्च की बजाए
हस्सास इदारों में
'टोबास्को सास' का इस्तेमाल किया गया
कारकर्दगी बेहतर हो जाने की वजह से
लोगों को चंद मिनटों में
एक ख़ूबसूरत मेज तक पहुंचाना मुमकिन हुआ
जिसपर
उनकी तबई मौत के
दस्तख़त किए हुए सर्टिफिकेट जमा थे
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बरीउज्जिमा : दोषमुक्त
जानशीन : उत्तराधिकारी
हस्सास इदारों : संवेदनशील अंगों
कारकर्दगी : कार्यक्षमता
तबई : प्राकृतिक, स्वाभाविक
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अफजाल अहमद सैयद
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