राबर्तो हुआरोज़ की 'वर्टिकल पोएट्री' से एक और कविता...

राबर्तो हुआरोज़ की कविता
(अनुवाद : मनोज पटेल)
चीजें नक़ल उतारती हैं हमारी.
हवा की गिरफ़्त में आया एक कागज़
पेश आता है किसी गिरते-पड़ते इंसान की तरह.
आवाजें सीख जाती हैं बतियाना हमारे समान.
हमारा आकार ग्रहण कर लेते हैं कपड़े.
चीजें नक़ल उतारती हैं हमारी
मगर हमारा अंत होगा
उनकी नक़ल उतारते हुए.
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राबर्तो ख़्वारोज़ राबर्तो ख्वारोज़
