Monday, August 22, 2011

टोंटी से टपक पड़ती है कविता


सलमा अल-नीमी की एक कविता... 













लालच : सलमा अल-नीमी 
(अनुवाद : मनोज पटेल)

शादीशुदा ज़िंदगी की चखचख शायराना नहीं होती 
न ही बच्चों की हाय-तौबा, 
बसों के धक्के और 
अखबारों की ख़बरें भी नहीं होतीं शायराना.
बर्तन माजते वक़्त 
मेरे हाथों में 
टोंटी से टपक पड़ती है कविता 
किसी मछली की तरह.                    
                  :: :: :: 

5 comments:

  1. कम शब्दों में बड़ं विस्तार को समेटे हुए है कविता.

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  2. TONTI SE TAPAK PADTA KAVITA BADI HI MARMIK HAI DIL KO CHOOOO LENE WALI .......

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  3. जिंदगी के सच से रूबरू कराती कविता

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