Friday, September 2, 2011

येहूदा आमिखाई : एक असीम शान्ति

येहूदा आमिखाई की कविता...  














एक असीम शान्ति : सवाल और जवाब : येहूदा आमिखाई 
(अनुवाद : मनोज पटेल)


बहुत तकलीफदेह रूप से रोशन एक प्रेक्षागृह में
लोग बातें कर रहे थे 
आजकल के इंसानों की ज़िंदगी में धर्म 
और उसमें ईश्वर के स्थान के बारे में.

लोग उत्तेजित स्वर में बोल रहे थे 
जैसा कि वे बोला करते हैं हवाईअड्डों पर.
मैं उन सबसे दूर चला आया :
"आपातकालीन द्वार" लिखा हुआ लोहे का दरवाजा खोला
और दाखिल हो गया 
एक असीम शान्ति : सवाल और जवाब के भीतर.
                    :: :: :: 

2 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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