Sunday, March 4, 2012

राबर्तो हुआरोज़ : सड़कें

राबर्तो हुआरोज़ की एक और कविता...  

 
राबर्तो हुआरोज़ की कविता 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

ऊपर की ओर ले जाने वाली सड़कें 
कभी नहीं पहुंचतीं वहां. 
नीचे की ओर ले जाने वाली सड़कें 
हमेशा पहुँच जाती हैं वहां तक. 

और फिर उन दोनों के बीच में भी होती हैं सड़कें. 

मगर कभी न कभी हर सड़क 
ऊपर की ओर ले जाती है या नीचे की ओर. 
                    :: :: ::

8 comments:

  1. .....और इसी चढते -उतरते रहने का नाम जिन्दगी है शायद ! अच्छी कविता !

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  2. बहुत खूब सुन्दर भावानुवाद मूल रचना का मजा .

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  3. bahut khoob....
    aur aaj tak ekdam sahi bhi...

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  4. ठीक जीवन की तरह...!
    सुन्दर कविता! आभार!

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  5. बहुत कुछ कह जाती है ये रचना ...

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  6. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    रंगों के त्यौहार होलिकोत्सव की अग्रिम शुभकामनाएँ!

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  7. कुछ सड़कें कहीं नहीं पहुचातीं...जीवन भर गोल गोल घुमाती ही रहती हैं. कविता अच्छी है...सड़कें भी जिन्हें मैं अभी रौंद के आयो हूँ...

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  8. सड़क का पूरा हिसाब-किताब रख दिया यहाँ!

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