Tuesday, March 27, 2012

डब्लू. एस. मर्विन : जुदाई

डब्लू. एस. मर्विन की एक कविता...   

 
जुदाई : डब्लू. एस. मर्विन 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

तुम्हारी जुदाई गुजर गई है मेरे भीतर से 
जैसे धागा किसी सूई में से. 
इसी के रंग से सिला होता है मेरा हर काम.  
                    :: :: :: 

5 comments:

  1. वाह!!!!!!!!
    चमत्कारिक...

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  2. प्रेम की जादुई अभिव्यक्ति जो अनायास दिल से गुजर गयी.

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  3. महीन सा विम्ब!
    सुन्दर!

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  4. गुज़र ही गई, हौले से.

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