Tuesday, February 21, 2012

एंतोनियो पोर्चिया : हर खिलौने को टूटने का हक है

एंतोनियो पोर्चिया की 'आवाजें' श्रृंखला से...  

 
आवाजें : एंतोनियो पोर्चिया 
(अनुवाद : मनोज पटेल) 

जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था, 
उससे मेरी इंतज़ार की आदत आई. 
:: :: :: 

स्वर्ग जरूर जाऊंगा, मगर अकेले नहीं 
अपने नरक के साथ. 
:: :: :: 

कुछ सपने होते हैं, 
जिन्हें आराम करने की जरूरत होती है. 
:: :: :: 

खालीपन की अनुभूति 
हम उसे भरकर करते हैं. 
:: :: :: 

हर खिलौने को टूटने का हक है. 
:: :: :: 

दिल को जख्म देना उसे रचना है. 
:: :: :: 

मेरा अभाव सम्पूर्ण नहीं है, 
उसमें मेरी कमी है. 
:: :: :: 
परिचय और पिछली पोस्ट यहाँ देखें : मेरी खामोशी में सिर्फ मेरी आवाज़ की कमी है  एंटोनियो पोर्चिया 

9 comments:

  1. लेखन का जादू..
    उम्दा

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  2. "कुछ सपने होते हैं
    जिन्हें आराम की ज़रूरत होती है." सूक्तिनुमा कविताएं भी आनंदित तो करती ही हैं.

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  3. बहुत ही बढ़िया! गज़ब!!

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  4. दिल को जख्म देना उसे रचना है..बेहतरीन....!!

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  5. दिल को जख्म देना उसे रचना है..बेहतरीन....!!

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  6. Dil ko zakhm dena, usay rachna hai
    Har khilone ko tootne ka haq hai

    Waah.. - Reena Satin

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